Shimla,sanju chaudhary(TSN)-हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत वोकेशनल शिक्षकों ने अब आर पार की लड़ाई का एलान कर दिया है रविवार से वकेशनल शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है और साफ तौर पर कह दिया है कि उनका यह आंदोलन उस समय तक समाप्त नही होगा जब तक उनके लिए कोई पालिसी बनाकर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाता।
बता दें कि पूरे प्रदेश भर में 2174 वोकेशन शिक्षको ने कक्षाओं का बहिष्कार कर आंदोलन पर डटे हैं। 30 मार्च से धरने पर बैठे शिक्षकों से मिलने आज नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी धरना स्थल पर पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनी।उन्होंने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि वह सरकार के समक्ष उनकी मांगों को रखेंगे जिससे उनकी समस्या का निदान हो सके।वहीं 9 दिनों से धरने पर डटे वोकेशनल शिक्षक संघ के अध्यक्ष अश्वनी धटवालिया को हार्ट अटैक के कारण IGMC ले जाना पड़ा।उपचार लेने के बाद अश्वनी धटवालिया धरना स्थल पर वापिस लौट आये और शिक्षकों के साथ आंदोलन में शामिल हो गए है।
अस्पताल से उपचार लेने के बाद वोकेशनल शिक्षक संघ के अध्यक्ष अश्वनी धटवालिया ने कहा कि अब उनका इज आंदोलन उस समय तक समाप्त नही होगा जब तक उनकी मांगों को सरकार में नही लेती।उन्होंने कहा अगर ज़रकार की मंशा उनकी मांगों को मानने की है फिर किस बात की अड़चन आ रही है।उन्होंने कहा व्यवसायिक शिक्षा को आगे ले जाने के लिए आंदोलन पर बैठे हैं।उन्होंने कहा कि जो बात सरकार ने की है उसे पूरा करे हम सरकार के साथ हैं।उन्होंने कहा कि अगर मंत्री व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उनकी बातों को मानती है और सरकार भी तैयार है तो फिर किस बात की अड़चन आ रही है।उन्होंने कहा कि अगर शिक्षकों को कुछ होता है तो जवाब के लिए सरकार तैयार रहे।
वहीं धरने पर बैठे व्यवसायिक शिक्षक नीरज बंसल ने सरकार को चेताते हुए कहा कि उनका यह आंदोलन उस समय तक जारी रहेगा जब तक उनके लिए कोई पॉलिसी नहीं बनाई जाती और कंपनियों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाता। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें आश्वासन नहीं लिखित तौर पर चाहिए।उन्होंने कहा कि वह सरकार से कुछ नहीं मांग रहे वह मात्र केवल यह चाहते हैं जो केंद्र से पैसा आ रहा है उस पैसे का 14 % कंपनियों को दिया जा रहा है।जबकि वह पैसा उन्हें न दिया जाए और कंपनी को बाहर कर वह पैसा शिक्षकों को सीधा दिया जाए।उन्होंने कहा कि अब शुक्षकों ने एलान कर दिया है कि या हम सीधे तौर पर कार्य करेंगे अन्यथा घर जाएंगे।वह अब किसी भी कीमत पर कंपनी के अधीन कार्य नही करेंगे।अब सरकार अगर कंपनी को बाहर करती है तो ही वह कार्य पर वापिस जाएंगे।
