राहुल चावला,धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में आए दिन हो रही भारी बरसात का सीधा असर कहीं न कहीं हमारे नदी-नालों और कृत्रिम झीलों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा हैं। बरसात चाहे कुल्लू, मनाली या मंडी में हो या किसी अन्य हिस्से में प्रदेश के हर क्षेत्र में उसका प्रभाव देखा जा रहा हैं।बात अगर कांगड़ा की करें तो यहां ब्यास नदी पर बनाए गये महाराणा प्रताप सागर झील में लगातार पानी का इनफ्लो बढ़ता जा रहा हैं। यही वजह हैं की पौंग डैम झील का जलस्तर 1 हजार 372 फीट रिकॉर्ड किया गया है जबकि रविवार को इसी डैम से पानी का इनफ्लो ज्यादा होने के चलते अलग अलग जगहों से 27 हजार क्यूसिक के करीब पानी नहरों की मार्फत बाहर छोड़ा गया था ताकि डैम में खतरे के निशान तक पानी न पहुंचे।
मदरअसल पौंग डैम में जलभराव की कपैसिटी 1 हजार 410 फीट की है, जबकि 1 हजार 390 फीट को खतरे का निशान माना गया हैं। ऐसे में पौंग डैम झील में जब पानी 1 हजार 370, 75 या 80 फीट के करीब पहुंचने शुरू हो जाता है तो उससे पहले ही बीबीएमबी मैनेजमेंट पौंग डैम झील के चीफ इंजिनियर को कहकर पानी की निकासी करवाने शुरू कर देती है,ताकि किसी भी सूरत में पौंग डैम झील में पानी खतरे के निशान के न तो आसपास पहुंचे और न ही उससे ऊपर जाए। ऐसे में इससे पहले कि पौंग डैम झील का जलभराव भारी बारिश के चलते छोड़े जा रहे पंडोह और दूसरे बांधों के पानी की बदौलत खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर हो प्रबंधन ने अब इसे लगातार छोड़ने का फैसला ले लिया हैं।
जिलाधीश डॉ. निपुण जिंदल ने पौंग डैम झील के आसपास रहने वाले रिहायशी इलाकों के लोगों से अपील की है कि बारिश के चलते अब पौंग डैम से पानी की रिलिजिंग रेगुलर की जा रही हैं, ऐसे में कोई भी शख्स दरिया के आसपास बिल्कुल भी न जाये और न ही अपने मवेशियों को लेकर वहां पर विचरण करें। पानी छोड़ने के बाद क्षेत्र में जलभराव का खतरा लगातार बना हुआ है और ऐसे में कभी भी किसी भी वक्त बांध के गेट खोले जा सकते हैं, जिसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ सकता है जो लापरवाही से पौंग डैम की ओर जाएंगे।
