राहुल चावला,धर्मशाला: शिक्षा विभाग में कार्यरत जलवाहक कम सेवादार कर्मचारी संघ, धर्मशाला में उपनिदेशक उच्च शिक्षा कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गया हैं। संघ का कहना है कि कई बार सरकार को अपनी मांगों बारे अवगत करवाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। हाल ही में आयोजित कैबिनेट मीटिंग से पहले भी संघ ने सरकार को चेताया था कि इस बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
इकाई के अध्यक्ष मदन लाल ने बताया कि उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में जलवाहकों की मांगों को लेकर निर्णय करने के बारे सरकार को चेताया था लेकिन सरकार ने उनकी बात को अनसुना कर दिया है। यही वजह हैं कि शुक्रवार से संघ ने अपना अनशन शुरू कर दिया हैं। वहीं अध्यक्ष मदनलाल ने मीडिया के माध्यम से मांगें पूरी न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। इसकी सूचना जब जिला प्रशासन को मिली तो एसडीएम धर्मशाला को जलवाहकों से बातचीत को भेजा गया।
संघ के अनुसार सरकार की पॉलिसी अनुसार जलवाहकों को 11 साल बाद नियमित करने की बात कही गई हैंम कई जलवाहक अपना 11 साल कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से न तो कोई नोटिफिकेशन जारी की गई और न ही नियमित किया गया। प्रदेश भर में 750 के करीब जल वाहक शिक्षा विभाग में कार्यरत है, कांगड़ा में लगभग 160 कर्मचारी हैं।
मदन लाल ने बताया कि मैंने जो आत्म+दाह का निर्णय किया था, इसकी सूचना मिलने पर एसडीएम धर्मशाला हमारे पास आए, जिन्होंने आश्वासन दिया है कि हमारी मांगों को सरकार के समक्ष रखेंगे। एसडीएम के आग्रह पर आत्म+दाह का फैसला जरूर वापिस लिया है, लेकिन सरकार से यही निवेदन है कि हमारे लिए उचित निर्णय लिया जाए। सब्र की एक सीमा होती है, सरकार को 4 माह का समय दे चुके हैं, जो भी अगला कदम उठाउंगा, उस बारे अधिकारियों को जरूर बताया जाएगा।
वहीं एसडीएम धर्मेश रमोत्रा ने बताया कि जलवाहक अपने नियमितिकरण को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे, जिन्होंने विभाग को ज्ञापन भी भेजा था। जैसे ही प्रशासन को पता चला कि जलवाहक भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनकी बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। डीसी कांगड़ा के निर्देशानुसार मैं इनसे मिलने आया हूं। हमारे आग्रह पर इन्होंने अपना आमरण अनशन समाप्त किया है, हमने भी इन्हें आश्वासन दिया है कि इनकी मांगों को सरकार को भेज दिया जाएगा।
