कुल्लू (मनमिंदर अरोड़ा): अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे के 372 साल के इतिहास में पहले प्रधानमंत्री हैं जो ऐतिहासिक देव मिलन के साक्षी बने हैं। बता दें कि दशहरा समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी हजारों की भीड़ में भगवान रघुनाथ के रथ तक पहुंचे। जहां उन्होंने भगवान रघुनाथ जी के आगे शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों को भी भीड़ को कंट्रोल करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हजारों की भीड़ के बीच उतरे और उन्होंने भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस दौरान भगवान रघुनाथ के आशीर्वाद के तौर पर उनकी टोपी में पवित्र पगड़ी भी बांधी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर अटल सदन के बाहर बने मंच से ही भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा का नजारा देख रहे थे। थोड़ी देर बाद ही पीएम मोदी मंच से नीचे उतरे और सुरक्षाकर्मियों के साथ में भगवान रघुनाथ के रथ की ओर निकल लिए।

भगवान रघुनाथ के रथ के बारे में ली जानकारी
पीएम मोदी को मैदान की ओर आता देख भीड़ भी उनकी ओर मुड़ गई और सभी लोग यह नजारा अपने मोबाइल में कैद करने में जुट गए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान रघुनाथ के रथ के पास जाकर जहां भगवान रघुनाथ के दर्शन किए। उन्होंने भगवान के रथ के बारे में भी भगवान रघुनाथ के छड़ी बरदार महेश्वर सिंह से जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने रथ के साथ खड़े देवी देवताओं का भी आशीर्वाद लिया और भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेन्द्र सिंह के साथ हुई दशहरा उत्सव को लेकर विशेष रूप से चर्चा की।

पीएम को राम दरबार किया गया भेंट
भगवान रघुनाथ के दर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस मंच की ओर आसीन हो गए। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के पहले दिन रथयात्रा में जहां हजारों लोग भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए ढालपुर पहुंचे। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने के लिए भी प्रदेश के विभिन्न इलाकों से भीड़ उमड़ी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के द्वारा जहां कुल्लू की टोपी और शॉल देकर सम्मान किया गया। तो वही राम दरबार भी उन्हें विशेष रूप से भेंट किया गया। इसके बाद मंच के चारों ओर से उन्होंने स्थानीय जनता के समक्ष खड़े होकर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन भी स्वीकार किया और हजारों की भीड़ भी मोबाइल में इस दृश्य को कैद करने में जुटी रही।

