कुल्लू : मनमिंदर अरोड़ा (TSN)- जिला कुल्लू की पार्वती घाटी को आज पर्यटन के तौर पर नहीं बल्कि डेथ और मिस्ट्री वैली के नाम से जाना जाता है। ऐसे में कुल्लू प्रशासन सरकार को चाहिए कि वह यहां पर पर्यटन संबंधित नियमों को लागू करें और सैलानियों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाए। ताकि यहां के पर्यटन से घाटी के हजारों लोगों को रोजगार मिल सके।
पार्वती वैली एडवेंचर टूअर् ऑपरेटर एसोसिएशन ने बताई समस्या
ढालपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्वती वैली टूर ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष डी आर सुमन का कहना है कि मणिकर्ण घाटी में बाहरी राज्यों से कई कंपनियां ऐसी है जो यहां पर बाहरी राज्यों के सैलानियों को ट्रैकिंग करवाती है। लेकिन उन कंपनियों के द्वारा ना तो कुल्लू प्रशासन को इस बात की जानकारी दी जाती है और ना ही उन सैलानियों का रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है। ऐसे में आए दिन सैलानी भी मणिकर्ण घाटी में हा+दसे का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसी कंपनियों पर भी सख्ती करें और सभी ट्रैकिंग रूटों पर चेक पोस्ट भी स्थापित की जानी चाहिए। ताकि यहां से गुजरने वाले सैलानियों की रजिस्ट्रेशन हो सके। डी आर सुमन का कहना है कि यह कंपनियां न तो प्रशासन का सहयोग करती है और न ही पहाड़ी में सफाई व्यवस्था का ख्याल रखती है। स्थानीय लोगों को भी इन कंपनियों के द्वारा कोई सहयोग नहीं दिया जाता है। बर्षेणी से रोजाना 1 हजार से अधिक पर्यटक विभिन्न इलाकों का रुख करते है। वहां एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है इसके अलावा सैलानियों के लिए कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए पूरी घाटी में 4 ए टी एम है जिसमे 2 ही काम कर रहे है। भुंतर से तोष गांव का अगर सर्वे किया जाए तो कहीं वर्षा शालिका नही है और हर जगह कचरे के ढेर लगे हुए है।
डी आर सुमन का कहना है कि 3 सालो से साडा के तहत पैसे बाहरी राज्यों के वाहनों से लिए जा रहे है। लेकिन उस पैसे का कहा प्रयोग किया जा रहा है। पार्वती घाटी में लोग पर्यटन कारोबार को बढ़ाना चाहते है लेकिन सरकार और प्रशासन इस बारे कोई काम नहीं करना चाहता है। ऐसे में आए दिन घाटी में सैलानियों के शव मिल रहे है। पार्वती घाटी को आज डेथ वैली और मिस्ट्री वैली के नाम से जाना जाता है। जिस कारण सैलानी अब यहां आने से डरते हैं। सरकार और प्रशासन अगर जल्द इस दिशा में काम नहीं करता है। तो पार्वती घाटी का पर्यटन कारोबार ठप्प हो जायेगा और पर्यटन न होने से घाटी के हजारों लोग बेरोजगार हो जायेगे। ऐसे में अब सरकार और प्रशासन को इस बारे जल्द निर्णय लेना होगा ताकि पार्वती घाटी के लोग और पर्यटन कारोबार सुरक्षित रह सके।
