धर्मशाला :राहुल चावला (TSN)-कृषि विभाग ने नार्थ जोन के तहत आते पांच जिलों में पीला रतुआ पर नजर रखने के लिए टीमें गठित की हैं। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से सर्विलांस टीम बनाई गई है। जिसमें ब्लाक स्तर के कृषि अधिकारी व विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट शामिल हैं।टीमें किसानों के खेतों तक जा रही है और अवलोकन कर रही है कि कहीं पीला रतुआ की समस्या तो नहीं है, यदि कहीं पीला रतुआ की समस्या हो तो टीम रिपोर्ट करती है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह प्रदेश भर में हुई बारिश से पीला रतुआ की समस्या से अभी तक राहत है। अमूमन गेहूं में पीला रतुआ का प्रकोप जनवरी व फरवरी माह में आता है। हालांकि पहले काफी लंबा ड्राईस्पेल किया, लेकिन बारिश से काफी राहत मिली है।
शुष्क मौसम में पीला रतुआ का प्रकोप
पीला रतुआ शुष्क मौसम में पनपता है, लेकिन हाल ही में अच्छी बारिश हुई है। यदि फिर भी पीला रतुआ का प्रकोप फसलों पर आता है तो उससे निपटने के लिए विभाग तैयार है। किसानों को यदि उनके खेतों में पीला रतुआ के लक्षण नजर आते हैं तो नजदीकी कृषि अधिकारियों से संपर्क करें, जिससे कि कृषि अधिकारी मौका पर जाकर समस्या का निदान कर सकें। इसके अलावा किसान प्रोपीकोनाजोल स्प्रे का छिड़काव भी पीला रतुआ से गेहूं की फसल को बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर कर सकते हैं।
27 हजार हेक्टेयर से ज्यादा एरिया था प्रभावित
कृषि विभाग के नार्थ जोन के तहत आते कांगड़ा, चंबा, मंडी,हमीरपुर और ऊना में 2 लाख 66 हजार 703 हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। इन जिलों में 27 हजार 832 हेक्टेयर के करीब एरिया सूखे की वजह से प्रभावित हुआ था, जिससे पिछले सप्ताह हुई बारिश से राहत मिली है।
नार्थ जोन धर्मशाला के तहत आते 5 जिलों में पीला रतुआ पर नजर रखने के लिए सर्विलांस टीमें बनाई हैं, जो कि किसानों के खेतों तक पहुंच रही हैं। पहले ड्राईस्पेल से कई क्षेत्रों में गेहूं की पत्तियां पीली पड़ गई थी, लेकिन पिछले सप्ताह हुई बारिश से राहत मिली है। यदि समस्या आती है तो विभाग निपटने के लिए तैयार है।
