कुल्लू : मनमिंद्र अरोड़ा- हिमाचल प्रदेश में करीब 4 सालों से कमर्शियल वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा रहा है। ऐसे में अब टैक्सी चालक इस जीपीएस सिस्टम को हटाने की मांग सरकार से रख रहे हैं।
टैक्सी चालक बोले सिस्टम नहीं हटा तो नहीं भरेंगे टैक्स
टैक्सी चालकों ने प्रदेश सरकार को यह चेतावनी भी दी है कि अगर मार्च माह तक उनकी टैक्सी में लगे जीपीएस सिस्टम को नहीं हटाया गया। तो वह मार्च माह में सालाना टैक्स भी नहीं भरेंगे और उनके इस निर्णय के साथ प्रदेश के 90 हजार टैक्सी ऑपरेटर शामिल है। ऐसे में टैक्सी ऑपरेटर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस बात की मांग कर रहे हैं कि जीपीएस सिस्टम को हटाकर से उन्हें राहत प्रदान की जाए। ऑपरेटरों का कहना है कि बाहरी राज्यों में जीपीएस सिस्टम जहां 7 से 8 हजार रुपए में लग रहा है तो उन्हें यहां पर 15 हजार रुपये तक यह सिस्टम उपलब्ध करवाया गया। जबकि इसका सालाना रिचार्ज भी 4500 रुपए है। टैक्सी ऑपरेटरों का कहना है कि जब वे खुद ही टैक्सी के चालक है तो उन्हें अपनी गाड़ी पर नजर रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार को चाहिए कि जिन व्यक्तियों के पास काफी अधिक कमर्शियल वाहन है उन्हें ही सिर्फ यह नियम लागू किया जाए।
टैक्सी ऑपरेटर प्रेम सिंह का कहना हैं कि जीपीएस सिस्टम लगाने वाली कई कंपनियां प्रदेश से भाग चुकी हैं। केवल एक कंपनी सिस्टम लगा रही और उसके दाम काफी ज्यादा है। टैक्सी चालकों का कहना है कि वह पहले ही 15 हजार रुपये की कीमत वाला जीपीएस सिस्टम अपनी टैक्सी में लगा चुके हैं। लेकिन अब वह कंपनी फरार हो गई है। अब एक ही कम्पनी इसे लगा रही है और मंदी के दौर में जीपीएस को रिचार्ज करवाना भी टैक्सी ऑपरेटरों के लिए मुश्किल हैं।
कुल्लू टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर वे मनाली में मुख्यमंत्री से भी मिले हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जल्द आप इस जीपीएस सिस्टम को ट्रैक्सियों से हटा देंगे। अगर मार्च माह तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो पूरे प्रदेश के 90 हजार टैक्सी ऑपरेटर अपना सालाना टैक्स जमा नहीं करवाएंगे।
