शिमला : कमल भारद्वाज ( TSN)- हिमाचल प्रदेश में 102 एवं 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से लोगों को बेहतर एवं जल्द स्वास्थ्य सुविधाएं देने का सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है। बाकायदा सरकार की ओर से इस सेवा में लगे वाहनों की समय -समय पर जांच कर कमेटियां बनाने के संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिए है। चेक लिस्ट बनाकर दर्शाया गया है कि किन बातो को ध्यान में रखकर जाँच करनी है।
लोगो का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों एवं एंबुलेंस सेवा संचालक संस्था की जुगलबंदी के चलते वाहनों की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे मरीज को आपात स्थिति में जान जोखिम में डालकर इन सेवाओं में लगे वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। इन वाहनों में सेवाएं दे रहे पायलट व अन्य स्टाफ भी वाहनों की कंडम हालत को देखते हुए रोगी को बचाने के लिए मजबूरन सेवाएं दे रहे हैं। सेवाओं में लगे कर्मचारी अगर मुंह खोलते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाले जाने का खतरा लगातार बना रहता है। वे वाहनों के मुरम्मत के नाम पर बनाए जा रहे फर्जी बिलो का खुलासा भी रोजगार छिन जाने के नाम पर नहीं कर सकते। लोगों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के निर्देशक को निर्देश दे कर ऐसे वाहनों की सूची बनाई जाए और संस्था को दिए जाने वाले भुगतान को भी तुरंत रोका जाए। ताकि सेवाएं जवाब देने के सरकारी प्रयासों को जमीन पर उतारा जाए।
