राहुल चावला, धर्मशाला: जिला कांगड़ा से होकर गुज़र रहे दो फोरलेन निर्माण कार्यों में धर्मशाला वन मंडल के तहत आने वाले एरिया के 3000 हजार पेड़ इस निर्माण की भेंट चढ़ेगें। यहां पठानकोट से मंडी और मटौर-शिमला फोरलेन बनने जा रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक पेड़ सिहुणी से राजोल पैकेज में हैं। यही नहीं ठानपुरी से परौर पैकेज में सबसे अधिक वन एरिया 8 हेक्टेयर फोरलेन की जद में आ रहा हैं।
इन दोनों फोरलेन की जद में धर्मशाला वन मंडल के तहत आने वाले वन क्षेत्र के तीन पैकेज आ रहे हैं। जिनमें सिहुणी से राजोल, चील बाहल भंगवार और ठानपुरी से परौर पैकेज शामिल हैं। वन मंडल धर्मशाला के तहत सिहुणी से राजोल पैकेज में 7.23 हेक्टेयर, चील बाहल पैकेज में 2.3 हेक्टेयर, जबकि ठानपुरी से परौर पैकेज में 8 हेक्टेयर वन भूमि आ रही हैं। इन तीनों पैकेज के केस बनाकर वन विभाग ने मंत्रालय को भेज दिए थे, जिनमें से चील बाहल पैकेज को इन प्रिंसिपल अप्रूवल भी मिल चुकी है और इस पैकेज में कटने वाले पेड़ों की मार्किंग भी शुरू हो गई हैं।
इस पैकेज में वन भूमि के 74 पेड़ आए हैं, जबकि ठानपुरी से परौर पैकेज में 780 और सिहुणी से राजोल पैकेज में सबसे अधिक 2400 पेड़ आए हैं। यूजर एजेंसी जब केस बनाया जाता है, उसी समय पेड़ों को गिनती का कार्य भी किया जाता है। गिनती होने के बाद ही एजेंसी केस बनाती हैं। सभी पैकेज में पेड़ों की गिनती हो चुकी हैं। वहीं चील बाहल पैकेज में प्री फैलिंग के लिए पेड़ों की मार्किंग का कार्य चल रहा हैं।
डीएफओ, वन मंडल धर्मशाला दिनेश शर्मा ने बताया कि जिला से होकर गुजर रहे दो फोरलेन में धर्मशाला वन मंडल के तहत सिहुणी से राजोल, चील बाहल और ठानपुरी से परौर तक वन भूमि आई हैं। वन भूमि के केस बनाकर मंत्रालय को भेजे गए हैं, जिनमें चील बाहल वाले पैकेज की इन प्रिंसिपल एपू्रवल भी आ चुकी है। इन तीनों पैकेज में करीब वन भूमि के 3000 हजार पेड़ काटे जाने हैं।
