विकास शर्मा ,ऊना। माता चिंतपूर्णी के दरबार में रविवार को भारतीय सेना और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब 6 डोगरा रेजिमेंट के कमान अधिकारी कर्नल रवींद्र सिंह रावत ने अपने परिवार के साथ माता के चरणों में शीश नवाया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में अपनी रेजिमेंट की ओर से भेंट की गई पीतल की भव्य शेर प्रतिमाओं का विधिवत अनावरण किया और ‘गीतियां-हाजीपीर बटालियन’ नामक स्मृति पट्टिका का उद्घाटन कर अपनी बटालियन की गौरवशाली विरासत को नमन किया।
जानकारी के अनुसार, ये शेर प्रतिमाएं कुछ समय पहले बटालियन द्वारा मंदिर में भेंट की गई थीं, जिनमें से एक प्रतिमा का वजन लगभग 40 किलोग्राम है। इन्हें मंदिर परिसर में संतोषी माता की मूर्ति के समक्ष पूजा-अर्चना के बाद स्थापित किया गया। स्मृति पट्टिका पर अंकित ‘गीतियां-हाजीपीर बटालियन’ नाम 6 डोगरा रेजिमेंट के ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण योगदान को दर्शाता है, जिसने 1965 के युद्ध में दुर्गम पहाड़ियों को पार कर हाजीपीर पास और गीतियां जैसी रणनीतिक चोटियों पर विजय प्राप्त की थी।
यह बटालियन अक्टूबर 1964 में स्थापित हुई थी और मात्र 11 महीनों के भीतर ही युद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया। इन अभियानों के दौरान 2 अधिकारियों और 21 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसके चलते बटालियन को ‘हाजीपीर’ बैटल ऑनर से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बटालियन से जुड़े पूर्व सैनिक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कर्नल रावत की इस पहल की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल बटालियन की परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित भी करते हैं।
कर्नल रावत ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के सफल संचालन के लिए माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद आवश्यक है। उन्होंने प्रार्थना की कि माता अपनी कृपा दृष्टि सदैव वीर जवानों पर बनाए रखें और उन्हें अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करें।
