मंडी/सीमा शर्मा: हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड ने पंजीकृत मनरेगा मजदूरों को मिलने वाले लाभ स्वीकृत करने पर अघोषित तौर पर रोक लगा दी है। जिसका सीटू से सबंधित मनरेगा व निर्माण मजदूर फेडरेशन ने कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन के जिला अध्यक्ष गुरदास वर्मा और महासचिव गोपेन्द्र शर्मा ने बताया कि हिमाचल सरकार और श्रमिक कल्याण बोर्ड मनरेगा मजदूरों के खिलाफ काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में यूपीए-2 की सरकार ने मनरेगा में एक साल में 50 दिन काम करने वाले मनरेगा मजदूरों को राज्य श्रमिक कल्याण बोर्डों के सदस्य बनने का अधिकार दिया था। लेਕਿन वर्ष 2017 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने पंजीकरण के लिए दिनों की शर्त 50 से बढ़ाकर 90 दिन कर दी थी और अब मनरेगा मजदूरों को बोर्ड का सदस्य बनने पर ही रोक लगा दी है। जिससे हिमाचल प्रदेश के चार लाख मज़दूर इससे प्रभावित होंगे। इसमें सबसे अधिक प्रभाव मुख्यमंत्री के ज़िला मंडी में पड़ेगा ,जहां पर अभी तक 80 हज़ार मज़दूर बोर्ड से पंजीकृत हुए हैं।
जिनमें से 52 हज़ार मनरेगा मज़दूर हैं। राज्य महासचिव भूपेंद्र सिंह ने कहा कि 20 सितंबर को राजमहल होटल मंडी में श्रम व रोज़गार मंत्री विक्रम सिंह की अध्यक्षता में बोर्ड की मीटिंग हुई है। जिसमें इस मुद्दे को भी एजेंडा में रखा गया था, लेकिन मंत्री ने उसे पेंडिंग रखने को कहा था। बावजूद उसके बोर्ड के सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनरेगा मजदूरों के लाभ शिमला से पिछले तीन महीने से जारी नहीं कर रहे हैं।राज्य महासचिव ने कहा कि भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार शुरू से ही मनरेगा मज़दूर विरोधी मानसिकता के आधार पर काम कर रही है। एक तरफ मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम 350 रुपए दिहाड़ी भी राज्य सरकार अदा नहीं कर रही है और अब उसने इन मजदूरों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षण छात्रवृति, विवाह शादी, चिकित्सा, प्रसूति, मृत्यु और पेंशन इत्यादि के लिए जो सहायता राशी मिलती थी उसे भी बन्द करने का फैसला लिया है।जिसका मनरेगा मज़दूर यूनियन पुरज़ोर विरोध करेगी और सरकार को अपना फैसला बदलने के लिए बाध्य करेगी। उन्होंने आरोप लगाया की मुख्यमंत्री जयराम और श्रम मंत्री के इशारे पर ही ये सब हो रहा है।
इसी सप्ताह श्रम मंत्री से मिलेगा यूनियन का प्रतिनिधिमण्डल
यूनियन का प्रतिनिधिमण्डल शिमला में इसी सप्ताह श्रम मंत्री से मिलेगा और उसके बाद भी अगर फ़ैसला नहीं बदला तो इसके खिलाफ जिला व ब्लाक स्तर पर प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। जिसकी योजना 1,2 अक्टूबर को मंडी में हो रहे राज्य सम्मेलन में तैयार की जाएगी।
