Bilaspur, Subhash-:डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर एसीसी कंपनी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। एसीसी विस्थापित संघर्ष समिति के सलाहकार एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भगत सिंह वर्मा ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली राशि का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा, जबकि नियमों की अनदेखी कर रात के अंधेरे में भारी ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
भगत सिंह वर्मा ने बताया कि खनन से प्राप्त रॉयल्टी और डीएमएफ के अंतर्गत आने वाली राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित छह पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। इस राशि का उपयोग सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर किया जाना चाहिए था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। उन्होंने कहा कि इन पंचायतों में विकास कार्यों का अभाव साफ दिखाई देता है, जिससे यह सवाल उठता है कि डीएमएफ की राशि आखिर कहां खर्च हो रही है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी उन्होंने गहरी चिंता जताई। वर्मा के अनुसार खनन क्षेत्र, विशेषकर बरमाणा इलाके में टीबी, त्वचा रोग और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद स्थानीय अस्पतालों की हालत बेहद खराब है। मरीजों को न तो पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं और न ही जरूरी दवाइयां और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं।रोजगार के मुद्दे पर भी उन्होंने कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाए। वर्मा का आरोप है कि एसीसी कंपनी स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित छह पंचायतों के लोगों को दिए गए रोजगार का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। रोजगार के अवसर न मिलने से क्षेत्र में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश इंटक के कार्यकारी अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने यह भी कहा कि CSR के तहत मिलने वाली राशि कथित तौर पर किसी एनजीओ को दी जा रही है, लेकिन उसका लाभ न तो स्वास्थ्य सेवाओं में दिख रहा है और न ही स्थानीय विकास कार्यों में।उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि डीएमएफ और CSR फंड के उपयोग की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए, रात में की जा रही ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और खनन से प्रभावित पंचायतों को उनका वास्तविक अधिकार और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
