अनिल कुमार,किन्नौर: प्रदेश में दो दिनों तक खराब रहे मौसम में किन्नौर जिला के ऊंचे ग्रामीण इलाकों में बर्फबारी हुई हैं तो वहीं निचले इलाको में भी बर्फ की सफ़ेद चादर बिछ गई हैं। बर्फबारी के बाद जिला के बागवानों व किसानों के चेहरे ख़ुशी से खिल उठे हैं।किन्नौर जिला में बर्फबारी के बाद बागवानों व किसानों को खेतों में सिंचाई से निजात मिली हैं वहीं सेब के बगीचों में चिलिंग आवर का समय भी पूरा होने की आश बागवानों को जगी हैं।
बर्फबारी के बाद जिला किन्नौर में जो सड़क मार्ग बंद पड़े हैं प्रशासन उन्हें बहाल करने में जुट चुका हैं। मशीनरी सड़कों पर लगाई गई है जिससे कि सड़कों को जल्द से जल्द वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल किया जा सके। किन्नौर जिला में जनवरी माह की इस पहली बर्फबारी ने बाग़वानों व किसानों को राहत की सांस दी हैं । बर्फबारी से कई ऊंचाई वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मार्ग अवरुद्ध हुए हैं जिसे प्रशासन बहाल करने क़ा काम शुरू कर चूका हैं। किन्नौर जिला के कल्पा, छितकुल, सांगला, रकछम, लिप्पा, आसरंग जैसे ऊंचे इलाकों में करीब 4 से 5 इंच बर्फबारी की सूचना मिली हैं।
बर्फबारी के बाद पीने के पानी के जलस्त्रोत भी जम गए हैं, ऐसे में लोगों को पीने के पानी की समस्याएं भी आने लगी हैं। बर्फबारी के बाद किसी के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली हैं, लेकिन किन्नौर प्रशासन ने पर्यटकों समेत स्थानीय लोगों को ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से मनाही की हैं ताकि बर्फबारी के बाद गलेशियर की चपेट में आने से किसी के जानमाल का नुकसान न हो।
जिला में बर्फबारी के बाद अब जिला के लोगों को उढ़ती धूल व सूखे से निजात मिली हैं। जिला के ऊंचाई वाले इलाकों के अलावा निचले क्षेत्रों में बारिश की बूंदा बांदी हुई हैं। निचले क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं होने से बागवानों व किसानों को अभी भी बर्फबारी क़ा इंतज़ार हैं। बर्फबारी के बाद जिला के ऊंचे ग्रामीण इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया हैं। वहीं जिला के निचले इलाके भी अब शीतलहर की चपेट में आ चुके हैं।
