संजु चौधरी, शिमला: प्रदेश में बागवानी का भविष्य ठीक नज़र नहीं आता। आज सेब बागवानी घाटे का सौदा बन गया है, फिलहाल इतना है कि बागवान आत्महत्या नहीं कर रहे। यहां बात पूर्व सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने मंगलवार को बागवानी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सचिवालय में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की मेजबानी में हुई बागवानी विभाग की बैठक में भाग लेने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कही।
इस बैठक में सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ ही जिला स्तरीय बागवान प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने पूर्व कि प्रदेश सरकारों पर बागवानों के मुद्दों को नजर अंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमा प्रदेश सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही हैं। राकेश सिंघा ने कहा कि देश में नियम हैं कि मंडियों में प्रत्येक उत्पाद वजन के हिसाब से बिकते हैं, ऐसे में सेब भी वजन के हिसाब से बिकना चाहिए। राकेश सिंघा ने जोर देते हुए सरकार से मांग की कि सरकार प्रदेश में “हिमाचल प्रदेश कृषि बागवानी उत्पाद मार्केटिंग रेगुलेटिंग एक्ट 2005” को लागू करें।
राकेश सिंघा ने कहा कि बागवानी के लिए हमेशा से नीतियां मौजूद रही हैं केवल इन नीतियों को अपडेट करने की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को प्रदेश में लागू करें और बड़े आड़तियों की मोनोपली को रोकने का प्रयास करें।
राकेश सिंघा ने पूर्व भाजपा सरकार पर व्यंग बाण चलाते हुए कहा कि जो जयराम ठाकुर 15 साल तक भाजपा सरकार चलाने की बात करते थे उन्हें जनता ने 5 साल में बाहर का रास्ता दिखा दिया हैं। राकेश सिंघा ने कहा कि पूर्व सरकारों ने बड़े आड़तियों के आगे घुटने टेक दिए। राकेश सिंघा ने आड़तियों को बड़े मगरमच्छ बताया और सेब के रेट कम देने की बात कही।
