कुल्लू (मनमिंदर सिंह): कुल्लू में भगवान रघुनाथ की नगरी रघुनाथपुर में अन्नकूट उत्सव परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस दौरान भगवान रघुनाथ अन्न के पहाड़ पर विराजमान हुए और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भगवान रघुनाथ के मंदिर पहुंच कर उनका आशीर्वाद लिया। अन्नकूट त्योहार को गोवर्धन पूजा से भी जाना जाता है। कुल्लू में इस दिन भगवान रघुनाथ को नए अनाज का भोग लगाया जाता है। इस मौके पर भगवान रघुनाथ का श्रृंगार करके चावल का पहाड़नुमा ढेर लगाकर उस पर उन्हें विराजमान करवाया जाता है।

माना जाता है कि जिस तरह से भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर गौवंश व ग्वालों की रक्षा की थी। उसी तरह कुल्लू में मनाए जाने वाले अन्नकूट त्योहार को भी गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान रघुनाथ को नया अनाज चढ़ाए जाने से भगवान रघुनाथ फसलों की रक्षा करते हैं और अन्न की कमी न होने का आशीर्वाद देते हैं। अन्नकूट त्योहार हर वर्ष दिवाली के दूसरे या तीसरे दिन मनाया जाता है। जिसके लिए शास्त्र पद्धति के अनुसार दिन का चयन किया जाता है।

भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि कुल्लू घाटी में अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाती है और अन्नकूट का अर्थ है कि इस मौसम में नए चावल दाल होती है और उसको भगवान के चरणों में अर्पित करते है। उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा द्वापर युग से लेकर चली आ रही है और जब से लेकर कुल्लू में रघुनाथ भगवान पदार्पण हुआ है। तब से लेकर अन्नकूट का त्यौहार दिवाली के तुरंत बाद मनाया जाता है और इसे गोवर्धन पूजा कहा जाता है। लिहाजा कुल्लू के रघुनाथपुर में इस परंपरा का परंपरागत तरीके से निवर्हन किया गया।श्रद्धालु नवीन सूट का कहना है कि वह बचपन से रघुनाथ मंदिर में होने वाले तमाम त्योहारों में पहुंचते हैं हालांकि अन्नकूट दीपावली के 1 दिन बाद मनाया जाता है लेकिन सूर्य ग्रहण होने के चलते यह 1 दिन देरी से मनाया गया।

