Dharamshala, Rahul Chawla-:अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयू एचपी) और आईआईटी रोपड़ को संयुक्त रूप से 103 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल को इन्फ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ 48 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। यह राशि विश्वविद्यालय को प्राप्त हो चुकी है और इसके माध्यम से रिसर्च की गुणवत्ता तथा सुविधाओं में और सुधार किया जाएगा।
रिसर्च यूनिवर्सिटी स्टेटस में सीयू एचपी देश में दूसरा
रिसर्च के क्षेत्र में लगातार प्रगति करते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश ने देशभर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एएनआरएफ की ऑल इंडिया रैंकिंग में रिसर्च यूनिवर्सिटी कैटेगरी में सीयू एचपी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बाद दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, शिक्षकों और शोधार्थियों के उत्कृष्ट कार्य की बदौलत यह उपलब्धि हासिल हुई है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बताया कि सीयू एचपी और आईआईटी रोपड़ के बीच हाल ही में हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) के तहत दोनों संस्थान मिलकर विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं पर काम करेंगे।इस साझेदारी के माध्यम से उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं एवं संसाधनों का लाभ प्राप्त होगा।इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने ‘साथी योजना’ के तहत भी आवेदन किया था, जिसके अंतर्गत सीयू एचपी और आईआईटी रोपड़ संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इस योजना के लिए कुल 79 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इससे दोनों संस्थानों के बीच शोध एवं तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
प्रो. बंसल ने कहा कि “एएनआरएफ के अंतर्गत हमें कुल 10.48 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो विश्वविद्यालय के आधारभूत ढांचे और रिसर्च गतिविधियों को मजबूत करने में उपयोग किए जाएंगे। साथी योजना में भी हमें 79 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। इससे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को उच्चस्तरीय रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि बीते दो वर्षों में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश को विभिन्न शोध परियोजनाओं के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में यह राशि रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर, उपकरणों और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स के विकास में प्रयोग होगी, जिससे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के शोध क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
