शिमला, 23 फरवरी -:मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने 207.11 करोड़ रुपये की लागत से इंदिरा गांधी मातृ-शिशु संकल्प योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण उपलब्ध कराना है। राज्यभर में 2,99,488 पात्र लाभार्थियों को इससे लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना जीवन के पहले 1,000 दिनों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जिसे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुपोषण की समस्या को कम करने, शिशु मृत्यु दर और रोगग्रस्तता में कमी लाने तथा समग्र पोषण स्तर में सुधार का प्रयास किया जाएगा।गंभीर तीव्र कुपोषित (SAM) और मध्यम तीव्र कुपोषित (MAM) बच्चों, कम जन्म वजन वाले शिशुओं और अन्य उच्च जोखिम समूहों की शीघ्र पहचान, सतत निगरानी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए सुदृढ़ रेफरल और अनुवर्ती तंत्र विकसित किया जाएगा। योजना के तहत वैज्ञानिक रूप से तैयार फोर्टिफाइड खाद्य प्रीमिक्स, दूध और अंडे उपलब्ध कराए जाएंगे, जो संशोधित राष्ट्रीय पोषण मानकों के अनुरूप होंगे।
फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे एनीमिया, दस्त और निमोनिया जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें। पोषण ट्रैकर, माता एवं शिशु सुरक्षा कार्ड और राज्य से ब्लॉक स्तर तक संयुक्त समीक्षा प्रणाली के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और सरकार इसे जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह योजना स्वस्थ और सशक्त प्रदेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।
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