शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत से जुड़े चर्चित मामले में एएसआई पंकज शर्मा को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जिन धाराओं के तहत गिरफ्तारी हुई है, वे इतनी कठोर नहीं हैं कि आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखा जाए।
न्यायमूर्ति विरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि पंकज शर्मा को 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और समान राशि के जमानती पर रिहा किया जाए। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी बिना अदालत की अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा और न ही मामले के किसी गवाह या संबंधित व्यक्ति पर दबाव डालेगा।
सीबीआई ने जमानत का कड़ा विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकराते हुए कहा कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लंबी हिरासत उचित नहीं मानी जा सकती।
सीबीआई ने 14 सितंबर को किया था गिरफ्तार
पंकज शर्मा को सीबीआई ने 14 सितंबर को उनके पैतृक गांव जोल बहल (घुमारवीं, जिला बिलासपुर) से गिरफ्तार किया था। अगले दिन उन्हें शिमला की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अदालत में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस रिमांड के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पंकज शर्मा का पक्ष
जमानत याचिका में पंकज शर्मा ने दावा किया कि वह निर्दोष है और उसे राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि वह कथित घटना के समय शिमला सदर थाने में बतौर असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) तैनात था और उसका पेन ड्राइव गायब करने की घटना से कोई संबंध नहीं है।
पृष्ठभूमि
विमल नेगी, जो उस समय राज्य सरकार के चीफ इंजीनियर थे, की मौत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। जांच के दौरान सीबीआई ने कहा था कि कुछ अहम डिजिटल साक्ष्य, जिनमें एक पेन ड्राइव भी शामिल थी, कथित रूप से गायब कर दी गई थी।
