ऊना | कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की अनदेखी और जनता की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जन आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की ओर से बंगाणा से एसडीएम कार्यालय तक जन आक्रोश रैली निकाली गई। रैली का नेतृत्व कुटलैहड़ के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने किया।
रैली को संबोधित करते हुए वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कुटलैहड़ के एक विधायक को केवल पेंशन की चिंता है, जबकि दूसरे को अपनी कुर्सी बचाने की, लेकिन क्षेत्र की जनता की समस्याओं की किसी को परवाह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुटलैहड़ की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने एसडीएम बंगाणा के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए राज्य सरकार को एक माह का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर रुके हुए विकास कार्य पूरे नहीं किए गए, तो कुटलैहड़ में बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।
वीरेंद्र कंवर ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि कुटलैहड़ की जनता की वास्तविक आवाज है। उन्होंने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और जनता उन्हें राजनीति करने नहीं, बल्कि काम करवाने के लिए बुलाती है। उन्होंने कहा, “घी अगर सीधी उंगली से न निकले तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है,” जिससे उन्होंने सरकार को कड़ा संदेश दिया।
उन्होंने कुटलैहड़ में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि क्षेत्र में किसी भी सूरत में गुंडाराज को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक ढील और राजनीतिक संरक्षण के कारण असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए वीरेंद्र कंवर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन झूठी गारंटियों के सहारे सत्ता हासिल की गई, वे आज तक धरातल पर नहीं उतरीं। उन्होंने सवाल उठाया कि सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार से जुड़ी गारंटियां कहां गईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो विधायक कभी रिपोर्ट कार्ड दिखाने की बात करते थे, वे आज जनता के सामने आने से क्यों कतरा रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने हाल ही में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित और बेघर हुए परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता देने की मांग भी सरकार से की। उन्होंने कहा कि कई परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस मदद नहीं पहुंची है, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अंत में वीरेंद्र कंवर ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक माह के भीतर कुटलैहड़ में विकास कार्य शुरू नहीं हुए और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि कुटलैहड़ की जनता के हक और सम्मान की लड़ाई है।
