By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Reading: हिमाचल प्रदेश में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार..राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल वर्षों से ठप्प
Share
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Search
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
© 2022 Dawn News Network Pvt Ltd. | News Media Company | All Rights Reserved.
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > himachal > हिमाचल प्रदेश में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार..राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल वर्षों से ठप्प
himachalNews

हिमाचल प्रदेश में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार..राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल वर्षों से ठप्प

Chandrika
Chandrika 5 Min Read
Updated 2025/02/03 at 4:52 PM
Share

शिमला,3 फरवरी(TSN)-हिमाचल प्रदेश में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार है।स्वास्थ्य विभाग खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और संबंधित नियम-कानून की खुले आम धज्जियां उड़ा रहा है।अफसरशाही की कोताही का नतीजा यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ब्लड बैंकिंग व्यवस्था चलाने के लिए स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में बनी राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल वर्षों से ठप्प पड़ी है।उसका पुनर्गठन नहीं हुआ है और 8 वर्ष से अधिक समय से उसकी कोई मीटिंग ही नहीं हुई।अव्यवस्था के कारण कई बड़े ब्लड बैंकों से आम रोगियों को समय पर आवश्यकता के अनुसार रक्त नहीं मिल पाता है। ऐसे में खून खरीदने- बेचने का खतरा पैदा हो गया है।

समाज सेवा एवं रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ रक्तदाता अजय श्रीवास्तव ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है क्योंकि यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानून के खुलेआम उल्लंघन का मामला है।

उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव का कहना ये

अजय श्रीवास्तव के अनुसार हिमाचल में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल शुरू से ही सिर्फ कागजों पर चलती रही।सरकार का स्वास्थ्य सचिव इसका अध्यक्ष होता है।हैरानी की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ब्लड बैंकिंग व्यवस्था का जिम्मा संभालने के लिए बनी यह काउंसिल अब दम तोड़ चुकी है।पिछले 8 वर्ष से अधिक समय से इसकी कोई मीटिंग ही नहीं हुई है।सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्यों में स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ब्लड बैंकों से संबंधित समस्त योजनाओं,उनके संचालन और आवश्यकताओं की पूर्ति का कार्य करेगी।इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं और रक्तदाताओं को मीडिया और कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक करने का कार्य भी शामिल है।यह वैधानिक व्यवस्था ठप हो जाने से ब्लड बैंकों में डॉक्टर, नर्स,टेक्नीशियन,डाटा एंट्री ऑपरेटर,ड्राइवर,अन्य संसाधनों की कमी की ओर कोई ध्यान नहीं देता।

स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की गैर मौजूदगी में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज समेत सभी प्रमुख ब्लड बैंकों में स्टाफ और उपकरणों की काफी कमी है।इस कारण से केंद्र सरकार द्वारा 100% कॉम्पोनेंट बनाने और इस्तेमाल करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।इससे हमेशा रक्त की कमी बनी रहती है। एक यूनिट रक्त से कम से कम तीन कंपोनेंट प्लाज्मा,प्लेटलेट और आरबीसी बनाकर तीन मरीजों को चढ़ाए जा सकते हैं।

कंपोनेंट सिपरेशन मशीन का उचित इस्तेमाल नहीं

प्रदेश के चार ब्लड बैंकों में कंपोनेंट सिपरेशन की मशीन है जिसका उचित इस्तेमाल नहीं किया जाता।प्रदेश में एफ्रेसिस (APHRESIS)मशीन किसी भी ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं कराई गई है।इस मशीन से रक्तदाता का सिर्फ आवश्यक कॉम्पोनेंट दान में लिया जाता है और बाकी रक्त शरीर में फिर से चला जाता है।हम तौर पर रक्तदाता साल में चार बार खून दान कर सकते हैं।लेकिन यदि यह मशीन हो तो प्लेटलेट्स एक साल में 24 बार दान किया जा सकता है।इस तरह अन्य कंपोनेंट भी बिना पूरा खून दान किए मशीन से निकल जा सकते हैं।प्रदेश के ब्लड बैंकों में स्टोर किया संपूर्ण रक्त और लाल रक्त कण 35 दिन तक खराब नहीं होते।यदि खून का फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा बना दिया जाए तो उसकी लाइफ एक वर्ष तक होती है।जबकि प्लेटलेट्स का जीवन 5 दिन का होता है।

राज्य में कुल 24 ब्लड बैंक

राज्य में कुल 24 ब्लड बैंक हैं जिसमें 20 सरकारी क्षेत्र में और चार गैर सरकारी क्षेत्र में चल रहे हैं।किस ब्लड बैंक में क्या-क्या दिक्कत आती हैं उन्हें समझने और हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित की गई वैधानिक व्यवस्था अस्तित्व में नहीं है।बीमार ब्लड बैंकिंग व्यवस्था से अस्पतालों में होने वाली रक्त की कमी का सबसे बड़ा खतरा प्रदेश में खून की खरीद फरोख्त का है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी खतरे को समाप्त करने के लिए 1996 में देश भर में एक व्यवस्था कायम की थी जो हिमाचल प्रदेश में समाप्त कर दी गई है। जब मरीज को खून खरीद कर चढ़ाया जाता है तो उसमें संक्रमित होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है जिससे मरीज की जान जा सकती है।

TAGGED: Shimla umang foundation
Chandrika February 3, 2025
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print
Previous Article सीएम सुक्खू बोले..सत्तापक्ष से भी ज्यादा विपक्ष के विधायकों की प्राथमिकताएं हुई पूरी
Next Article अजय वर्मा ने संभाला पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष का कार्यभार..मुख्यमंत्री का जताया आभार
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category
  • Accident
  • Business /Employement
  • crime
  • education
  • election
  • festival
  • health
  • himachal
  • News
  • political
  • political
  • Religion
  • Sports
  • Uncategorized
  • weather
  • शख़्सियत

You Might Also Like

महाधिवक्ता ने नव अधिवक्ताओं को दिए नैतिकता और न्याय के संदेश

Ago

रोहड़ू और छौहारा की पंचायतों में उत्साहपूर्ण मतदान, कई क्षेत्रों में 85 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज

Ago

जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, मुख्य सचिव की नियुक्ति पर उठाए सवाल

Ago

रामपुर के बैली पुल में दरारें बढ़ीं, प्रशासन ने यातायात पर लगाई रोक

Ago

1058, Mall Enclave, DAYAL NAGAR,
Ludhiana, Punjab 141001

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?