संजीव महाजन,नूरपुर: 14वीं वाहिनी एनडीआरएफ नूरपुर की ओर से कार रेसक्यू कोर्स का समापन आज हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता 14वीं वाहिनी के बलजिंद्र सिंह सेनानी की ओर से की गई। कोर्स में एनडीआरएफ की विभिन्न वाहिनियों क़े 31 प्रशिक्षणर्थियों ने 14वीं वाहिनी एनडीआरएफ क़े प्रशिक्षकों एवं धर्मशाला स्काई वे के सहयोग से दो दिन तक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
परीक्षाणार्थियों को संबोधित करते हुए एनडीआरएफ 14वीं वाहिनी के बलजिंद्र सिंह सेनानी ने कहा की एनडीआरएफ प्राकृतिक एवं मानवीय आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, इमारत गिरने और रेल /बस दुर्घटनाओ की स्थिति में बचाव कार्य करने क़े साथ-साथ स्वच्छ भारत अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, पर्यावरण एवं वन सुरक्षा में भी सहायता प्रदान करता करता आ रहा है। उन्होंने कहा की पिछले कुछ वर्षों में एनडीआरएफ विश्व स्तर पर अग्रणी आपदा प्रबंधन बल के रूप में उभरा है।
एनडीआरएफ आपदा रेस्क्यू अभियानों में मानव जीवन और राष्ट्रीय संपत्ति को बचाने में सबसे जांबाज बल क़े रूप में सेवा कर रहा है। देश में होने वाली किसी भी प्रकार की आपदाओं से निपटने में यह बल हमेशा आगे रहता है। उन्होंने बताया की केंद्र सरकार रोप-वे को पहाड़ी इलाकों में सामान्य यातायात का विकल्प बनाना चाहती हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों में रोप-वे हादसों ने इस सिस्टम पर सवाल उठाए है,जैसे झारखंड क़े देवधर में त्रिकुट पर्वत पर रोप -वे का केबल टूटने से हुए हादसे में 48 घंटे तक श्रदालु हवा में लटके रहे।
वहीं हिमाचल प्रदेश में सोलन में टिंबर ट्रेल रोप -वे की केबल कार बीच में रुकने से 11पर्यटक घंटो तक मौत से जूझते रहे। देश में कुछ महिनों क़े अंदर बड़े- बड़े रोप -वे हादसे हो चुके है। भले ही इन हादसों में मरने वालों की संख्या ज्यादा नहीं रही हो, फिर भी हवा में गहरी घाटियों की सुंदरता निहारते हुए जाने क़े इस एडवेंचर पर हादसे संभावित है। इसी क्रम में एनडीआरएफ अपने रेस्कीयूरों को इन हादसों क़े दौरान रोप -वे में फंसे व्यक्तियों को कैसे सुरक्षित निकाला जा सकता है के बारे में प्रशिक्षण प्रदान कर रही है, ताकि भविष्य में इसप्रकार का कोई भी हादसा होता हैं तो एनडीआरएफ तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन कर सके।
