सोलन / 17 मार्च -:स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के गृह क्षेत्र से सटे छौशा गांव में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को ग्रामीणों ने एकत्र होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी जाहिर की।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), जो लगभग 37 साल पहले वीरभद्र सिंह की सरकार के दौरान बनाया गया था, आज डॉक्टरों की कमी के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। अस्पताल में नियमित डॉक्टर न होने से मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ता है, जिससे उन्हें सोलन, कंडाघाट या शिमला का रुख करना पड़ता है।ग्रामीणों का आरोप है कि सायरी क्षेत्र में पर्याप्त डॉक्टर होने के बावजूद छौशा में स्थायी तैनाती नहीं की जा रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा गांव में अन्य समस्याएं भी गंभीर बनी हुई हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, रविवार को पानी की सप्लाई न होना, और सड़कों पर सरकारी बसों का बार-बार खराब होना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।इसके साथ ही तहसील कार्यालय को कंडाघाट से ममलीघ स्थानांतरित किए जाने पर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इससे उन्हें अपने काम करवाने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे जन आंदोलन शुरू करेंगे और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देंगे।
