सचिन शर्मा, मनाली: प्रदेश में जिन स्कूलों के आसपास न तो बिजली है न सड़क है और न ही मोबाइल नेटवर्क हैं, ऐसे स्कूलों के प्रति विभाग को गंभीर होने की आवश्यकता हैं। इन स्कूलों को हार्ड एरिया स्कूल घोषित किया जाना चाहिए। यह मांग राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ हिमाचल प्रदेश की मनाली के बरान स्कूल में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में संघ ने प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष उठाई हैं।
राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ हिमाचल प्रदेश के प्रधान दुर्गानंद शास्त्री ने बताया कि जिला के ऐसे अनेकों स्कूल है जिनमें सड़क व बिजली भी नहीं पहुंची हैं जबकि शाकटी जैसे क्षेत्र में अभी तक न तो मोबाइल नेटवर्क है और न ही बिजली हैं । ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक व विभाग के ऑनलाइन कार्यक्रमों की जानकारी न होने से तकनीकी युग में भी अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा हैं। इन स्कूलों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को भी सामान्य क्षेत्रों की बजाय काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं लेकिन ताज्जुब की बात है कि ऐसे क्षेत्रों के स्कूल अभी तक हार्ड एरिया में शामिल नहीं किया गया हैं।
संघ ने बैठक के माध्यम से विभाग से सवाल किया कि आखिर हार्ड एरिया स्कूलों की परिभाषा क्या है ? इसके अलावा बैठक में पुरानी पेंशन बहाली तथा तीन फ़ीसदी डीए की घोषणा के लिए भी प्रदेश सरकार का आभार जताया ओर लंबित डीए को जल्द ज़ारी करने की भी मांग रखी । अध्यापक संघ ने विद्यार्थियों व अध्यापकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर मंथन किया ओर प्रदेश सरकार से मांग की कि कक्षा छठी से दसवीं तक होने वाली विभिन्न परीक्षाओं के मूल्यांकन की समय सीमा संशोधित की जाए। सभी सीएंडवी अध्यापकों को भारत सरकार के 23 अगस्त 2010 के राजपत्र के अनुसार योग्यता व अनुभव के आधार पर टीजीटी पदनाम व लाभ दिए जाएं। सभी माध्यमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षक, भाषा व कला अध्यापकों के पद सृजित किए जाएं ओर अध्यापकों के स्थानांतरण के लिए 35 बच्चों की शर्त हटाई जाए, 20 वर्ष सेवाकाल के बाद सीएंडवी अध्यापकों को मिलने वाली विशेष वेतन वृद्धि 10 वर्ष के बाद मिले।
संघ ने मांग उठाई हैं कि समग्र शिक्षा के तहत होने वाली खंड स्रोत समन्वयक की नियुक्ति सीएंडवी वर्ग से भी की जाए, कला विषय को छठी से दसवीं कक्षा तक अनिवार्य किया जाए ओर कक्षा दस जमा एक व दो में इसे ललित कला विषय के रूप में संचालित किया जाए। उपनिदेशक कार्यालय में विज्ञान व शारीरिक शिक्षा की तर्ज़ पर सभी शिक्षकों के पद सृजित किए जाएं, सभी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा व संस्कृत के पद सृजित किए जाएं। एसएमसी अध्यापकों को स्थाई नीति बनाई जाए ओर नियमित अध्यापकों की नियुक्ति से हटाए गए पात्र एसएमसी अध्यापकों को पुनः नियुक्ति दी जाए। सभी अध्यापकों को अन्य विभागों की तर्ज पर वार्षिक चिकित्सा अवकाश दिया जाए ओर प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर कैशलेस सुविधा प्रदान की जाने की मांग भी बैठक में उठी।
बैठक में कला व शारीरिक शिक्षकों को विज्ञान विषय की तरह प्रैक्टिकल भत्ता दिए जाने और संस्कृत विषय में होने वाली आचार्य को एमए के समकक्ष मानने, मिड डे मील जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों को शिक्षकों की बजाय किसी दूसरी व्यवस्था के माध्यम से संचालित करने की मांग भी उठाई गई।
