Shimla, Sanju-हाटी समुदाय को संवैधानिक संशोधन के जरिए भले ही अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिल गया हो, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में यह कानून अब तक लागू नहीं हो पाया है। इस विलंब का खामियाजा 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें ST प्रमाण पत्र के अभाव में छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं के लाभों से वंचित रहना पड़ रहा है।
केंद्रीय हाटी समिति की शिमला इकाई ने इसे संसद और कानून का अपमान करार देते हुए राज्य सरकार से हिमाचल हाईकोर्ट में इस मामले की प्राथमिकता से पैरवी करने की मांग की है।समिति के शिमला अध्यक्ष डॉ. रमेश सिंगटा ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार का टालमटोल रवैया हाटी समुदाय के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने बताया कि कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर चुके हैं, लेकिन ST प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल रही।डॉ. सिंगटा ने कहा कि सरकार ने न केवल कानून को लागू करने में देरी की, बल्कि उसकी गलत व्याख्या कर स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। हाटी समिति ने प्रदेश के राज्यपाल और केंद्र सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है।
