मंडी : परी शर्मा- हिमाचल प्रदेश में अक्षम खिलाड़ियों से शायद सरकार नजरे फैर रही है। बाकी राज्यो की सरकारें खिलाड़ियों को रूपयों से लेकर नौकरी तक देती है लेकिन हिमाचल सरकार ठीक से प्रोत्साहन राशि भी खिलाड़ियों को नही दे पा रही है।
मंडी जिला के सरकाघाट उपमंडल के भडरेसा गांव की दिव्यांग खिलाड़ी पलक भारद्वाज के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। जब ओलंपिक खेलों का आयोजन होता है तो भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को पलकों पर बैठाया जाता है.जब खिलाड़ी मेडल जीतकर वापिस अपने वतन लौटते हैं तो उनपर सरकारें करोड़ों की बौछारें करने के साथ-साथ सरकारी नौकरियों का पिटारा भी खोलती है, लेकिन अक्षम खिलाड़ियों से शायद सरकार नजरे फैर रही है। मंडी जिला की एक दिव्यांग ओलंपिक विजेता खिलाड़ी बीते 7 वर्षों से अपने हक का इंतजार कर रही है, लेकिन सरकार के पास शायद इस दिव्यांग खिलाड़ी को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से भी मिले कोरे आश्वासन
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के सरकाघाट उपमंडल के भडरेसा गांव की दिव्यांग खिलाड़ी पलक भारद्वाज ने 2015 में पलक ने अमेरिका के लॉस एंजलिस में स्पेशल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया. रोलर स्केटिंग में देश को दो सिल्वर मेडल दिलाए. जब पलक वापिस अपने देश पहुंची तो सरकार ने इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। पलक के पिता भीम सिंह भारद्वाज 2015 से आज तक अपनी बेटी के हक की लड़ाई लड़ रहे है। पलक के पिता ने कहा कि वह अपनी बेटी को पिछले सात सालों से अपनी बेटी को दर बदर भटका रहे है। उनहोने कहा कि बाकी राज्यो की सरकारें खिलाड़ियों को 10 से 15 लाख दे रही है लेकिन हिमाचल सरकार प्रदेश के खिलाड़ियों को कोई प्रोत्साहन नही दे रही। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी आश्वासन दिया लेकिन एक से कोई जवाब नही मिला है। उन्होने कहा कि जिस तरह से सक्षम खिलाड़ियों के लिए सरकार दरिया दिली दिखा रही है वैसे ही इन अक्षम बच्चों के बारे में भी सरकार सोचें ताकि इन खिलाड़ियों भविष्य भी सुरक्षित रहे।
