मंडी :धर्मवीर (TSN)- हिमाचल प्रदेश में विद्युत बोर्ड के ठेकेदारों ने कॉस्ट डाटा रिवाईज न होने के बाद सेंट्रल जोन मंडी में नए टेंडर डालने पर रोक लगा दी है। इनका कहना है कि विद्युत विभाग के द्वारा लिखित रूप में आश्वासन मिलने के बाद भी कॉस्ट डाटा की दरों को नहीं बढ़ाया है। ठेकेदारों ने यह फैसला हिम पावर कॉन्ट्रैक्ट यूनियन के बैनर तले मंडी में आयोजित बैठक के दौरान लिया। इस बैठक में सेंट्रल जोन मंडी के दो दर्जन के करीब ठेकेदारों ने भाग लिया।
यूनियन की यह बैठक हिम पावर कॉन्ट्रैक्ट यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष तिलक राज की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस मौके पर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष तिलकराज ने बताया कि बिजली बोर्ड प्रबंधन ने कास्ट डाटा की दरों में 50 फ़ीसदी की कटौती कर दी है। जबकि महंगाई को ध्यान में रखते हुए इसमें हर वर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है। पहले जिस बिजली को खंभे को लगाने के लिए कॉस्ट डाटा 4 हजार होती थी आज वह 2 हजार रह गई है। जिसके ठेकेदारों को घाटे पर काम करना पड़ रहा है। इसके अलावा ऑफलाइन टेंडरिंग, जीएसटी और पेमेंट का मुद्दा भी पिछले 1 साल से ठेकेदारों द्वारा उठाए जा रहा है। जिसे भी विभाग व सरकार द्वारा दरकिनार किया जा रहा है। इनका कहना है कि बिल कटते ही ठेकेदारों को जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, जबकि प्रबंधन की ओर से 5 से 6 महीने बाद उसका भुगतान किया जाता है। मजबूरन अब ठेकेदारों को नया टेंडर बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जब तक विभाग के द्वारा इनकी इन मांगों पर गौर नहीं किया जाता है तब तक ठेकेदार कोई भी नया टेंडर नहीं डालेंगे और आने वाले समय में पूरे प्रदेश में ऐसा ही होगा ।
ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया की भी उठाई मांग
वही तिलक राज ने बताया कि जल शक्ति विभाग में 5 लाख तक के टेंडर ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किए जाते हैं जबकि बिजली बोर्ड में ऐसा नहीं है। किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय ठेकेदार बिजली बोर्ड के कार्य को करते हैं। उन्होंने मांग उठाते हुए कहा कि बिजली बोर्ड में भी 5 लाख तक के टेंडर की प्रक्रिया को ऑफलाइन किया जाए। जिससे स्थानीय ठेकेदारों को भी इसका लाभ मिल सके।
