अरविंदर सिंह, हमीरपुर: प्रदेश सरकार की ओर से हर घर नल हर घर जल योजना के तहत प्रदेश के हर घर में नल के माध्यम से पानी पहुंचाने के दावे किए जा रहे है। उसी से अलग बड़सर के दर्जनों गांव ऐसे भी है जहां ग्रामीण पानी की एक एक बूंद को तरस रहे है। ऐसे में भाजपा की इस योजना पर विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने सवाल खड़े किए है।
उन्होंने कहा कि सरकार हर घर नल हर घर जल योजना का रोना रोकर लोगों को गुमराह कर रही है जबकि हकीकत यह है कि क्षेत्र के लोग सरकार व विभाग की लापरवाही के कारण पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे है। इस योजना के तहत भी बीजेपी ने अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का काम करते हुए क्षेत्र में बंदर बांट की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार लोगों को मुलभुत सुविधा देने मे पूरी तरह नाकाम रही है। बीजेपी सरकार की हर घर नल हर घर जल योजना पर करोड़ों रूपए खर्च होने के बावजूद भी लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे है। आलम यह है कि बीजेपी की इस योजना के तहत घरों मे नल तो लगे लेकिन उनमे जल की एक बूंद तक नहीं टपकी है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी हर मंच से इस योजना के तहत 18 लाख नल लगाने के राग अलाप लाप रही है लेकिन सच्चाई यह है कि धरातल पर आज भी लोगों को पानी की बूंद बूंद के लिए मोहताज होना पड रहा है। ऐसा की वाक्य बड़सर विधानसभा क्षेत्र मे देखने को मिल रहा है। बड़सर के दर्जनों गांव ऐसे है जिनमें आठ से दस दिनों के बाद पानी की आपूर्ति हो पा रही है। ग्रामीणों को अपने काम काज को छोड़ आज भी पानी की तलाश मे भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है । सरकार ने हर घर नल हर घर जल की योजना पर करोड़ फूंक डाले लेकिन इस योजना के तहत लगाए गए नलों मे पानी कहां से आएगा इस पर कोई काम नहीं किया ।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत बनाए गए दर्जनों स्टोरेज टैंक ऐसे है जिन्हें अभी कनेक्शन तक नहीं दिया गया है। यही कारण है कि बीजेपी सरकार की ये योजना धरातल पर उतरने से पहले ही हवा हवाई हो गई है। उपमंडल बड़सर के दर्जनों गांव गुजरेड़ा, चंगर,टांगर,सुलहाड़ी, बिझड़ी, तरोपका,चलैली, महाराल, ठौ, जटा घरयाणी सहित अन्य कई ऐसे गांव है जहां जलशक्ति विभाग पर्याप्त पानी मुहैया करवाने मे असमर्थ साबित हुआ है। क्षेत्र मे भरपूर बारिश होने के बाबजूद सरकार व जलशक्ति विभाग कई लापरवाही के कारण लोगों को पानी के लिए तरसने को मजबूर होना पड़ रहा है।करोड़ों खर्च करने के बाबजूद लोगों को टैंकर के माध्यम से पानी मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है।
