शिमला,12 जनवरी(TSN)-हिमाचल प्रदेश के मशहूर लोकगायक कपिल शर्मा और सूर्यांश पुंडीर की जोड़ी ने संगीत जगत में धमाकेदार एंट्री की है।इनका नया गाना “हीरा लाड़िए” यूट्यूब पर धमाल मचा रहा है।रिलीज होने के कुछ दिनों में ही हजारों लोग इस गाने को सुन व देख चुके है। कपिल शर्मा व सूर्यांश पुंडीर का नया गाना ” हीरा लाड़िए ” सिर्फ एक गाना नही है।यह हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के जीवन पर आधारित मार्मिक कहानी है।जो उनके जीवन की सादगी और सुंदरता का अनुभव कराता है कि कैसे हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण परिवेश में एक महिला अपने जीवन में संघर्ष करती है और क्या उसकी दिनचर्या रहती है।
कपिल शर्मा और सूर्यांश पुंडीर की जोड़ी ने अपने पहले ही गाने में अपनी प्रतिभा और संगीत की शिक्षा का अद्भुत नगीना पेश किया है । प्रदेश के नामी संगीतज्ञ दोनों युवाओं की सोच को दाद दे रहे है। लोग उनके इस गाने पर सोशल मीडिया में तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे है। लोगों का कहना है कि कपिल शर्मा और सूर्यांश पुंडीर के इस गाने को सुनने के बाद, यह स्पष्ट होता है कि यह गाना संगीत जगत में एक नए युग की शुरुआत करेगा। लोगों का तर्क है कि आज के युग में कलाकारों के में जल्दी प्रसिद्धि हासिल करने की होड़ है। उन्होंने संगीत को शोर शराबा बना दिया है। अपने गानों में ऐसी खिचड़ी पका रहे है जिसमें यह मालूम ही नहीं पड़ता कि गाना हिंदी ,अंग्रेजी या पहाड़ी है।उस शोर शराबे से दूर यह गाना मधुर संगीत का उदाहरण है। ऐसे में सभी को यह गाना सुनना चाहिए और इसके बारे में अपने अनुभव साझा करने चाहिए। यह गाना न केवल हमें मधुर संगीत का अनुभव प्रदान करता है, बल्कि यह हमें ग्रामीण महिलाओं की सादगी और सुंदरता के बारे में बताता है और उनके अपने परिवार के लिए कैसे एक महिला सँघर्ष करती है उसका अनुभव कराता है।
पहाड़ी संस्कृति की जड़ों से जुड़ा रहना लक्ष्य -कपिल शर्मा
वहीं लोकगायक कपिल शर्मा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के अलग अलग जिलों की अपनी अलग अलग संस्कृति है। हर ज़िले में हमारे बुजुर्गों ने ऐसी खूबसूरत रनचाएँ लिखी है जिसको सुन कर रोंगटे खड़े हो जाते है।लेकिन उनकों पहचान नहीं मिल पाई।ऐसे हमने यह बीड़ा उठाया है कि उन रचनाओं को हिमाचल की ठेठ पहाड़ी संस्कृति में गाकर लोगों के बीच ले जाएंगे।हीरा लाड़िए से इसकी शुरुआत है।हमें पूर्ण विश्वास है कि हिमाचल के लोग इसको जरूर पंसद करेंगे। कपिल शर्मा ने कहा कि अक्सर लोग हमसे यह कहते कि उस गायक ने ऐसा गाया,उसने ऐसा गाया उसे इतने लोगों ने देख लिया। इन सब विषय मे उनका यह स्पष्ट मानना है कि उनका किसी से कोई मुकाबला नहीं है और ना ही संगीत को सोशल मीडिया में व्यूज के लिए गाते है।संगीत में उनकी रुचि है और वह भी ठेठ पहाड़ी संगीत में,इसलिए वह गाते है और आगे भी गाते रहेंगे। उनका मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है।बल्कि एक कला है जो प्रदेश के इतिहास को अपने आप में संजो कर रखता है और बुजुर्गों ने कई ऐसी रचनाएं लिखी है जो प्रदेश के इतिहास को बताती है ऐसे में उन रचनाओं को गाकर उनको लोगों के बीच ले जाना है और पहाड़ी संस्कृति की जड़ों से जुड़ा रहना लक्ष्य है।
