मंडी : धर्मवीर – नम्बरदारों के माध्यम से सरकार साल में दो बार जमीन पर वसूलती है। इसे आम भाषा में ’’मामला गुराही’’ कहा जाता है। जमीनों के मालिक इस शब्द को अच्छी तरह से जानते हैं क्योंकि वे भी साल में दो बार मामला अदा करते हैं। मामले के रूप में दिया गया कर नम्बरदारों के माध्यम से सरकार के खाते में जाता है। नम्बरदार मामला लेने पर एक सादे कागज पर अपनी मोहर लगाकर उसे रसीद के तौर पर जमीन के मालिक को दे देते हैं। आज जब यह नम्बरदार मामला उगाही के लिए गोहर उपमंडल के गणई गांव निवासी सेवानिवृत अवर सचिव कमल देव चौहान के घर पहुंचे तो उन्होंने कच्ची रसीद दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई।
कमल देव चौहान का कहना है कि जब यह राजस्व सरकार के खाते में जा रहा है तो फिर इसकी पक्की रसीद क्यों नहीं दी जा रही। कमलदेव ने तुरंत प्रभाव से यह मामला तहलीदार गोहर के ध्यान में भी लाया और इस पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। कमल देव का कहना है कि आज के दौर में ऐसी कच्ची रसीद देने से लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां फैलती हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि मामले के रूप में की जाने वाली राजस्व उगाही की पक्की रसीद दी जाए, ताकि लोगों में कोई भ्रांति न फैले।
नम्बरदार भी बोले- हमें पक्की रसीदें दो, हमें कोई आपत्ति नहीं
मामला उगाही करने आए नम्बरदार खेम सिंह और दिला राम भी इस बात से सहमत नजर आए और कहा कि अगर सरकार उन्हें पक्की रसीदें उपलब्ध करवाती है तो इससे उनके कार्य में ही आसानी होगी। नम्बरदार खेम सिंह और दिला राम ने बताया कि आज दिन तक उन्होंने मामलों की उगाही ऐसी ही कच्ची रसीदों के माध्यम से की है। कोर्ट केस में भी उनकी यही रसीद वैध मानी जाती है। लेकिन सरकार अगर पक्की रसीदें उपलब्ध करवाए तो यह बेहतर रहेगा।
क्या होता है मामला
मामला राजस्व विभाग में सभी की जमीनों से वसूले जाने वाले कर को कहा जाता है। इस कर को सदियों से वसूला जाता आ रहा है। प्रति बीघा के हिसाब से यह मामला लिया जाता है जोकि मुश्किल से 100 या 500 रूपए बनता है। यह कर साल में दो बार रबि और खरीफ की फसलों के दौरान वसूला जाता है और इसे वसूलने का कार्य नम्बरदारों का होता है।
