अरविंदर सिंह,हमीरपुर: कृषि विभाग ने जिला के किसानों को मक्की की फसल में लगने वाले फॉल आर्मीवर्म के प्रति आगाह किया हैं। हमीरपुर ज़िला के सुजानपुर, बमसन व नादौन क्षेत्र के कुछ भागों में फॉल आर्मीवर्म के प्रारंभिक लक्षण देखने को मिले हैं । कृषि विभाग की टीम ने इन क्षेत्रों का दौरा भी किया है और उपनिदेशक कृषि की अगवाई की स्तिथि पर नज़र रखी जा रही हैं।
विभाग के कृषि विकास अधिकारी अरविंद चहल ने बताया कि इस कीट ने पिछले वर्ष मक्की की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों की नजदीकी से निगरानी करते रहें और फॉल आर्मीवर्म के लक्षण दिखने पर तुरंत विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें।
हमीरपुर जिला में 30250 हेक्टर भूमि में मक्की की फसल की पैदा की जाती हैं। ऐसे में किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकें इसके लिए विभाग ने पहले ही मुस्तैदी दिखा रहा हैं।
आप को बता दें कि फॉल आर्मीवर्म के कीट की सुंडी अवस्था नुकसानदायक है ओर यह फसल की सभी अवस्थाओं में क्षति पहुंचाती हैं। नवजात सुडियां समूह में पत्तों के हरे पदार्थ को एक तरफ से खाती हैं जिससे पत्तों में पतले सफेद कागज जैसे चकत्ते ओर छोटे-.छोटे छिद्र बन जाते हैं। बड़ी सुंडियां प्राय, एक या दो की संख्या में पौधे के पर्ण चक्रों में घुसकर पत्तों को खाती हैं जिससे पत्तों में बड़े छिद्र हो जाते हैं। पत्तों में व पर्ण चक्रों में सुंडियों की बीठ व बुरादे जैसा भूरे रंग का पदार्थ भी देखा जा सकता है। बाद की अवस्था में सुंडियां भुट्टे के अंदर घुसकर दानों को भी खाती हैं।
कृषि विकास अधिकारी अरविंद चहल ने बताया कि इस कीट के प्रभावी प्रबंधन के लिए आरंभ से ही कीट व निगरानी के साथ-साथ कीट नियंत्रण के विभिन्न उपायों को एक समेकित प्रणाली के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि कीट का सही नियंत्रण नहीं होता है तो मक्की की फसल पर 60 से 70 फ़ीसदी नुकसान होने का अंदेशा बना रहता हैं।
उन्होंने बताया कि स्पीड से बचाव के लिए फसल के बीच में अरहर, लोबिया और माश इत्यादि फसलें लगाने से भी इस कीट को नियंत्रित किया जा सकता हैं। इसके साथ ही विभाग की ओर से सभी ब्लॉक स्तर पर इस कीट के नियंत्रण के लिए दवाइयां भी भेजी जा चुकी हैं।
