संजु चौधरी, शिमला(TSN): सोमवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र मे जाने से पहले भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विपक्ष की ओर से मानसून सत्र के दौरान किन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा जाना है इसे लेकर भाजपा विधायकों ने चर्चा की। वहीं मानसून सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने सत्ता पक्ष के ऊपर दबाव बनाने का पूरा प्रयास किया। विपक्ष ने नियम 67 के तहत काम रुको प्रस्ताव के चलते हिमाचल प्रदेश में आई आपदा के प्रबंधन को लेकर सभा अध्यक्ष से सदन में चर्चा मांगी।
नियम 67 के तहत सारे काम को स्थगित करने को लेकर विपक्ष ने आग्रह करते हुए स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सबसे पहले इसी विषय पर चर्चा मांगी। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं क्योंकि इससे बड़ी घटना इससे बड़ी त्रासदी पिछले 100 साल के इतिहास में प्रदेश में नहीं देखी है और ऐसी स्थिति में हमारे इस प्रस्ताव का बहुत महत्व हैं। उन्होंने कहा की हजारों की संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। 400 से ज्यादा लोगों की जिंदगी चली गई। अभी भी प्रदेश में बहुत जगह सड़के बहाल नहीं हो पाई हैं, पानी की स्कीमें बंद पड़ी हैं, बिजली बहाल नहीं हो पाई हैं और कम्युनिकेशन भी प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि जिस हिमाचल प्रदेश में हम गर्व के साथ रहते थे यह वैसा हिमाचल प्रदेश है जहां एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो फुटपाथ पर सोता होगा । आज हिमाचल प्रदेश में एसी स्थिति आ गई की हजारों की संख्या में लोग बेघर हो गए उनका पुनर्वास किस प्रकार से किया जाए? लोगों के 400 ,500 पौधे जो 20-20 साल से फल दे रहे थे वह बगीचा ही चला गया इसके साथ सरकारी संपत्ति का भी नुकसान हुआ हैं। ऐसे में प्राथमिकता के तौर पर मुझे लगता है कि सरकार की ओर से भी इसी विषय पर सबसे पहले सभी कार्यों को रोककर चर्चा होनी चाहिए, इसलिए नियम 67 के तहत आज हमने इस प्रस्ताव को रखते हुई तुरंत चर्चा मांगी है और सभी विधायक भी इसी चर्चा में भाग लेना चाहेंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र से मदद मांगने की बात हम पहले से ही कर रहे हैं और विपक्ष की ओर से हमेशा हमने प्रयत्न किया है की इस आपदा की घड़ी में हम केंद्र से जितनी भी मदद करने की मांग कर सकते हैं वह हमने मांग की हैं। व्यक्तिगत रूप से मैं केंद्र में एक बार नहीं अनेक बार गया और केंद्र से मदद मांगी। केंद्र से प्रदेश को मदद मिली भी हैं। यह भी मैं कहना चाहूंगा कि अभी तक हिमाचल प्रदेश में जितनी भी आपदाएं आई है सबसे ज्यादा मदद अगर मिली है तो वर्तमान में हमारी केंद्र की सरकार ने दी हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने कहा कि प्रदेश की और मदद करने आग्रह करने में कोई आपत्ति नहीं हैं। जिस प्रकार से कांग्रेस सरकार की ओर से जो प्रयास हो रहे हैं प्रदेश सरकार की ओर से प्रबंधन की दृष्टि से जो प्रयास होने थे उसको लेकर उनके हाथ खड़े हो गए हैं। यह सारा ठीकरा केंद्र सरकार के ऊपर फोड़ना चाहते हैं। पहली जिम्मेवारी ओर सबसे बड़ी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की है और केंद्र सरकार लगातार मदद कर रही है और मदद करने का आग्रह कर रही हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र ने हिमाचल की मदद करने से इनकार नहीं किया है ना ही यह कहा गया है कि हम हिमाचल की मदद नहीं करेंगे ऐसे में इस सारे विषय पर जब चर्चा होगी तो विचार किया जाएगा लेकिन पहले हमारी प्राथमिकता यह हैं कि नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए, न कि सरकारी प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा इस विषय पर करनी चाहिए।
