Kangra, Sanjeev-:नूरपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत लोहरपुरा में आज “फोकस ग्राम पंचायत मंथन कार्यक्रम” का आयोजन हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह सुलयाली में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर पंचायत की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की संभावनाओं पर सामूहिक चिंतन करना रहा। कार्यक्रम में पंचायत के सभी वार्डों से लगभग 150 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर 10 महिला मंडलों, 21 स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बाल विहार, युवती समूह, युवा समूह, किसान संगठनों और दिव्यांग प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, गुरु स्तोत्रम और आरती के साथ आध्यात्मिक वातावरण में की गई।चिन्मय ग्रामीण विकास संगठन (CORD) के वरिष्ठ कार्यकर्ता विपिन कश्यप ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मंथन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कोर्ड द्वारा ग्रामीण विकास के लिए निर्धारित 9 प्रमुख बिंदुओं की पंचायत स्तर पर समीक्षा करना और आगामी वर्षों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करना है।
विपिन कश्यप ने पूज्य स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म केरल के एर्नाकुलम जिले में हुआ था और उनका बचपन का नाम बालकृष्ण मेनन था। वर्ष 1949 में उन्होंने ऋषिकेश में स्वामी शिवानंद महाराज से संन्यास दीक्षा ली तथा उत्तरकाशी में स्वामी तपोवन महाराज से वेदांत, गीता, उपनिषद और पुराणों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने सनातन संस्कृति के प्रचार के साथ-साथ ग्रामीण समाज के सर्वांगीण विकास हेतु महत्वपूर्ण कार्य किए।उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में CORD की स्थापना की गई, जो वर्तमान में देश के 10 राज्यों में सक्रिय है। संस्था 2200 से अधिक महिला मंडलों और 3000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही है। फोकस ग्राम पंचायत मंथन कार्यक्रम चिन्मय अमृत महोत्सव एवं आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 42 पंचायतों में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं और 170 पंचायतों तक इसे पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
आज के सत्र में लोहरपुरा पंचायत में कोर्ड द्वारा पिछले 20 वर्षों में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही भविष्य की रणनीति पर विचार करते हुए निर्णय लिया गया कि महिला मंडलों में नई बहुओं को जोड़ा जाएगा, स्वरोजगार और आजीविका के नए साधन विकसित किए जाएंगे, प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जाएगा, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा तथा गांवों में स्वाध्याय संगठन गठित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति बनी।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक सहयोग और सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।
