Mandi, Dharamveer-:मंडी में जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बाल विवाह उन्मूलन और गोद ग्रहण (अडॉप्शन) की कानूनी प्रक्रिया पर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में 15 विभागों के कर्मचारियों और विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बाल अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम और अडॉप्शन की सही प्रक्रिया के बारे में लोगों को जागरूक करना था, ताकि समाज में व्याप्त गलत प्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी एनआर ठाकुर ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 के अनुसार देश में 23.3 प्रतिशत विवाह ऐसे हैं, जिनमें लड़कियों की आयु 18 वर्ष से कम पाई गई। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण यह समस्या अब भी समाप्त नहीं हो सकी है। इस स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 से देशव्यापी बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया है। इस अभियान का लक्ष्य दिसंबर 2024 तक बाल विवाह के प्रतिशत को घटाकर 10 करना और वर्ष 2030 तक भारत को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाना है।
कार्यशाला में आए प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकथाम अधिनियम और इसके कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के साथ-साथ उनसे बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलाई गई।अडॉप्शन के विषय पर जानकारी देते हुए एनआर ठाकुर ने कहा कि आज भी कई लोग नियमों को समझे बिना बच्चों को गोद ले लेते हैं, जिससे आगे चलकर कानूनी और सामाजिक समस्याएं पैदा होती हैं। सरकार ने गोद लेने के लिए एक स्पष्ट और सुरक्षित प्रक्रिया निर्धारित की है, जिसे अपनाना अनिवार्य है। गलत प्रक्रिया से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि बच्चों का भविष्य भी प्रभावित होता है।कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को प्रशिक्षित कर उन्हें रिसोर्स पर्सन के रूप में आगे समाज में जागरूकता फैलाने के लिए तैयार किया गया। उम्मीद जताई गई कि ये लोग अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह रोकथाम और अडॉप्शन की कानूनी प्रक्रिया के प्रति लोगों को जागरूक कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
