राज्यपाल ने बताया कि इसी क्रम में 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश के काशी में “नशा मुक्त युवा फार विकसित भारत” शीर्षक से एक युवा आध्यात्मिक चिंतन शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें उन्होंने समापन समारोह में भाग लिया।प्रदेश में नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जाहिर करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार को शीघ्र ही एक नया नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र स्थापित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस अभियान की प्रेरणा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली है। अभियान के तहत विद्यार्थियों, महिला मंडलों और पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है।
राज्यपाल ने बताया कि हर जिले में अभियान की शुरुआत की गई और नशे के खिलाफ जनजागरूकता रैलियों का आयोजन किया गया। कई पंचायतों ने अब यह फैसला लिया है कि नशा करने वालों को पंचायत की सुविधाओं से वंचित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिले के समय विद्यार्थियों से नशा न करने का शपथ पत्र भरवाया जाएगा।उन्होंने बताया कि मेले, त्योहारों और उत्सवों की थीम को भी नशामुक्ति केंद्रित बनाया गया है, ताकि व्यापक सामाजिक संदेश दिया जा सके। खेल प्रतियोगिताएं, एनसीसी, एनएसएस और युवक मंडलों की सहभागिता से यह अभियान जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने सभी विधायकों को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्रों में इस दिशा में कार्य करने का आग्रह किया है ताकि नशे के खिलाफ एक समन्वित सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जा सके।
