चंबा: जिला चंबा के ऐतिहासिक मिंजर मेले का रविवार को आगाज़ हो गया है। यह मेला 31 जुलाई तक चलेगा जिसमें विभिन्न तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारंभ राज्यपाल राजिंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। सबसे पहले सुबह चंबा नगर परिषद कार्यालय से एक शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा लक्ष्मी नारायण मंदिर से होती हुई अखंड चंडी महल पहुंची। इस बीच सबसे पहले मिर्जा परिवार की ओर से बनाई गई जरी के गोटे की मिंजर को भगवान लक्ष्मी नारायण को अर्पित किया गया। उसके बाद सदर विधायक व अन्य गणमान्य लोगों ने मिलकर अखंड चंडी महल में भगवान रघुवीर को मिंजर अर्पित की। जिसके बाद शोभा यात्रा ऐतिहासिक चौगान मैदान पहुंची जहां पर राज्यपाल ने ध्वजारोहण कर मेले का आगाज़ किया।
मेले में हजारों महिलाओं ने एक साथ नाटी डालकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। यह नाटी मेले का मुख्य आकर्षण रही जिसे राज्यपाल ने भी सराहा। इस दौरान मिंजर मेले में लगने वाले अलग-अलग विभागों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनियों का भी राज्यपाल ने विधिवत उद्घाटन किया ओर साथ ही खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आगाज़ किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का गौरवमयी इतिहास ओर समृद्ध लोक परम्पराएं राज्य की प्रगति ओर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक मिंजर मेले की अपनी अलग पहचान है। समृद्ध लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण ओर प्रोत्साहन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्होंने मेले के सफल आयोजन में आधुनिकता को उचित रूप से शामिल किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चंबा की अपनी समृद्ध लोक संस्कृति है ओर इसे सदियों से लोगों द्वारा संरक्षित रखा गया है।
उन्होंने लोगों से इसी प्रकार स्थानीय पारम्परिक लोक संस्कृति तथा सामाजिक सौहार्द को संरक्षित रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिकता के प्रभावों के बावजूद अपनी पारम्परिक संस्कृति को संजोए रखा है ओर यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिसका श्रेय पूरे प्रदेश में मनाए जाने वाले विभिन्न मेलों ओर उत्सवों को जाता है। वहीं इस अवसर पर लोक कलाकारों ने पारंपरिक कुजड़ी मल्हार गीत का गायन भी किया।
मिंजर मेले के दौरान आठ दिन तक रात्रि के समय सांस्कृतिक संध्याओं का भी आयोजन किया जाएगा दिन के समय चौगान मैदान में खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। पूरा साल लोग को इस मेले का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते है। पिछले दो सालों से कोरोना की वजह से मिंजर मेले का आयोजन नहीं हो पाया। इसी को लेकर इस बार लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
चंबा रुमाल ओर चंबा चप्पल का भी किया ज़िक्र
राज्यपाल ने चंबा के प्रसिद्ध चंबा रूमाल ओर चंबा चप्पल का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि चंबा जिला चंबा चप्पल ओर चंबा रूमाल की जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई टैग) के कारण प्रसिद्ध हो रहा है।
