By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Reading: सांगला में कुछ अनोखा होता हैं होली का त्यौहार, बेरिंग नाग देवता से अनुमति ले कर तीन दिन मनाया जाता हैं होली पर्व
Share
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Search
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
© 2022 Dawn News Network Pvt Ltd. | News Media Company | All Rights Reserved.
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > festival > सांगला में कुछ अनोखा होता हैं होली का त्यौहार, बेरिंग नाग देवता से अनुमति ले कर तीन दिन मनाया जाता हैं होली पर्व
festivalhimachal

सांगला में कुछ अनोखा होता हैं होली का त्यौहार, बेरिंग नाग देवता से अनुमति ले कर तीन दिन मनाया जाता हैं होली पर्व

admin
admin 5 Min Read
Updated 2023/03/09 at 12:21 AM
Share
अनिल कुमार,किन्नौर: हिमाचल में रंगों का त्योहर होली बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। अपने अपने क्षेत्र और जिला में लोगों ने इस त्यौहार को रंग और गुलाल उड़ा कर और एक दूसरे को गुलाल लगाकर मनाया। वहीं अगर बात प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर की की जाए तो किन्नौर जिला में भी होली का यह पर्व धूमधाम से मनाया गया। किन्नौर जिला के सांगला में होली का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन यहां इस पर्व को मनाने की परंपरा अलग ओर रोचक हैं।
सांगला में होली पर्व का जश्न पूरे 3 दिनों तक चलता है और इस दौरान हम लोग यहां अपनी पारंपरिक वेशभूषा में और पारंपरिक अब आधे यंत्रों की थाप पर जमकर नृत्य करते हैं। लोग जमकर होली का गुलाल भी उड़ाते हैं। सांगला में होली का यह पर्व अभी से नहीं बल्कि आदिकाल से इसी जश्न और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। मान्यता है कि आदिकाल में बेरिंग नाग देवता के समय से ही सांगला में होली का यह पर्व मनाया जा रहा हैं।
यह रहती हैं यहां होली का पर्व मानने की परंपरा
सांगला में होली का पर्व पहले दिन बेरिंग नाग देवता से आशीर्वाद लेकर मंदिर परिसर से शुरू किया जाता हैं। यहां पुरुषों रामायण के पात्रों और किरदारों के रूप में होली के इस जश्न के लिए तैयार होते हैं। इसमें मुख्य किरदारों में बाबा, राजा, रानी सहित क्लब के सदस्य व स्थानीय लोग सहित पहले दिन छुदो सारिंग नामक जगह दारो संगथांचुदेन व कोरखायो से होते हुए विभिन्न प्रकार के व्यंजनो का पूजा पाठ करने के उपरांत सभी को भोज करवाने के बाद मंदिर परिसर पहुंच जाते हैं। वहीं जश्न दूसरे दिन होलिका को तैयार किया जाता हैं जिसमे हनुमान, बाबा व रानियों सहित मंदिर से आजाद कश्मीर,बोनिंग सारिंग, बरमारंग स्थान होते हुए शाम छः बजे के करीब वापिस मंदिर पहुंचते हैं।  सांगला में होली का पर्व पूर्णमासी के दो दिन पहले शुरू होता है व तीसरे दिन पूर्णमासी के शाम को सभी चरित्रों सहित होलिका की झांकी बनाई जाती हैं। उसके बाद तोंगतोंगचे नाला, खराले, पुदो नाला,शाओ, शङ्गो सारिंग कोष्याचु होते हुए शाम को मंदिर पहुंचते हैं। यहां देर शाम को पूर्णमासी देखते ही होलिका का दहन किया जाता हैं।
होली पर्व को लेकर यह भी जुड़ी हैं मान्यता 
सांगला में होली पर्व को मनाने को लेकर यह भी मान्यता है कि  हजारों साल पहले सांगला के पूर्वज वृंदावन गए थे। यहां वृंदावन में कृष्ण और राधा की होली खेली जा रही थी। सांगला के जो पूर्वज वृंदावन गए थे उन्होंने वहां राधा और कृष्ण की होली देखी थी। इसके बाद उन्होंने सांगला वापस आकर वृंदावन  की तर्ज पर होली यहां मानने का फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने सांगला के कुल देव बैरंग नाग देवता से वृंदावन की तर्ज पर होली मनाने की अनुमति मांगी  और देवता बेरिंग नाग देवता ने गांव ने होली खेलने की अनुमति गांव वालों को दे दी तब से लेकर आज तक सांगला में तीन दिवसीय होली पर्व धामिर्क श्रद्वा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा हैं।
आशीर्वाद आमंत्रित करने ओर बसंत के आगमन का प्रतीक हैं होली पर्व 
सांगला में होली आशीर्वाद आमंत्रित करने और वसंत के आगमन की घोषणा करने का एक तरीका हैं। यहां होली न केवल मनाई जाती है, बल्कि पूजनीय भी हैं। यहां होली के पर्व की शुरुआत तोटू नामक व्यंजन बनाने से होती हैं। फागुली के दौरान , दीवाली की तरह ही तेल के दीपक जलाए जाते हैं।
होली जश्न की यह रहती हैं पूरी प्रक्रिया
सांगला में स्थानीय परंपराओं के अनुसार होली समारोह में भाग लेने के लिए सुबह सभी लोग नाग मंदिर में इकट्ठा होते हैं। पुरुषों को महाकाव्य रामायण के पात्रों के रूप में तैयार होने के लिए चुना जाता हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर परेड एक गांव से दूसरे गांव की ओर जाने लगती हैं। इन परेडों के दौरान पात्र रामायण के युद्ध के दृश्यों का प्रदर्शन करते हैं, जबकि महिलाएं एक मंडली में स्थानीय नृत्य करती हैं । फागुली की दूसरी रात में  लोग होलिका दहन करते हैं और उसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं। पारंपरिक परिधान पहन कर बुराई पर अच्छाई को दर्शाने के लिए होलिका दहन का जश्न मनाने के लिए नाचते-गाते हैं। सांगला में होली केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि यह लोगों की संस्कृति और परंपरा का उत्सव हैं,जो सबसे बेहतरीन तरीके से मनाया जाता हैं।
TAGGED: celebrated, Holi festival, Kinnaur, permission, Sangla, unique
admin March 9, 2023
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print
Previous Article होली के रंग में रंगी राजधानी, पर्यटकों ने भी खूब उड़ाया गुलाल,गंज में कृष्ण ने राधा संघ खेली होली
Next Article बरोटीवाला में महिला ने लगाया गांव के ही व्यक्ति पर रेप की कोशिश का आरोप
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category
  • Accident
  • Business /Employement
  • crime
  • education
  • election
  • festival
  • health
  • himachal
  • News
  • political
  • political
  • Religion
  • Sports
  • Uncategorized
  • weather
  • शख़्सियत

You Might Also Like

इस बार शनि जयंती पर विशेष संयोग, भव्य तरीके से सजाया गया छोटी काशी का शनिधाम

Ago

हिमाचल में 11 मई से फिर बदलेगा मौसम, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी

Ago

महिलाओं की सुविधा से समझौता नहीं, KNH पर बोलीं प्रतिभा सिंह

Ago

शिमला में दर्दनाक हादसा, आग की चपेट में आने से नेपाली युवक की मौत

Ago

1058, Mall Enclave, DAYAL NAGAR,
Ludhiana, Punjab 141001

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?