मंडी,धर्मवीर(TSN)-छोटी काशी मंडी की होली देश में एक दिन पहले मनाई जाती है।लेकिन यहां की होली के कुछ नियम हैं जिनका आज भी मंडीवासी बखूबी निर्वहन करते हैं। सुबह से ही होली खेलने और नाचने-गाने का कार्यक्रम शुरू हो जाता है।लेकिन जैसे ही दोपहर के दो बजते हैं तो सभी अपना नाच-गाना छोड़कर राज माधव राय मंदिर की तरफ अपना रूख कर देते हैं।यहा प्रशासन की तरफ से तहसीलदार सदर भगवान राज माधव राय की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं और उसके बाद उनकी भव्य शाही पालकी पूरे शहर की परिक्रमा पर निकलती है।राज माधव राय की पालकी के साथ लोग खूब झूमते,नाचते-गाते हुए शहर की परिक्रमा करते हैं। लोगों के पास जो गुलाल बचा हुआ होता है उसे अंत में इसी पालकी पर फैंका जाता है और उसी के साथ यहां होली का त्यौहार भी संपन्न होता है।
पालकी पर लोगों ने जमकर फैंका गुलाल,अपने प्रभु के साथ मनाई होली
वीरवार को भी जैसे ही राज माधव राय की पालकी नगर भ्रमण पर निकली तो लोगों ने अपने प्रभु पर गुलाल फैंककर होली मनाई और उसके बाद सभी अपने-अपने घरों की तरफ रवाना हो गए।मान्यता है कि इसके बाद कोई किसी को
गुलाल नहीं लगाता।स्थानीय निवासी अनिल सेन,नरेश वैद्य और मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि मंडी की होली देश भर में अपनी तरह की एक अनूठी होली है। जहां नाच-गाना भी खूब होता है और अपने भगवान के साथ भी खूब होली मनाई जाती है। इनका मानना है कि ऐसी होली देश के किसी कोने में देखने को नहीं मिलती।
बता दें कि राज माधव राय को मंडी शहर का राजा कहा जाता है।कोई भी शुभ कारज इनकी अनुमति के बीना शुरू नहीं होता।राजा सूरजसेन के जब सभी पुत्रों का निधन हो गया था तो उन्होंने अपना राजपाठ राज माधव राय को सौंप दिया था और खुद सेवक बन गए थे,तभी से राज माधव राय को मंडी शहर का राजा कहा जाता है। राज माधव राय भगवान श्रीकृष्ण का रूप हैं।
