राहुल चावला, धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के नए कारनामे को लेकर इन दिनों प्रदेश के कॉलेजों में छात्रों परेशान घूम रहे हैं। विश्वविद्यालय की ओर से प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रहे बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है। विश्वविद्यालय ने इस परीक्षा परिणाम को दो बार घोषित किया है और इस परिणाम में बहुत से छात्रों को फेल किया गया है जिसे लेकर अब छात्रों का आक्रोश बढ़ गया है। छात्र लगातार कॉलेजों के बाहर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को प्रदेश के सबसे पुराने डिग्री कॉलेज धर्मशाला में पढ़ाई कर रहे छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी के बैनर तले कॉलेज परिसर में एकत्र होकर एचपीयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और यूनिवर्सिटी प्रशासन को होश में आने की चेतावनी दी।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने प्रदेशभर के तमाम कॉलेजों में पढ़ रहे बीएससी और बीकॉम के छात्रों का हाल ही में 21 नवंबर को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है। मगर परीक्षा परिणाम छात्रों के अनुकूल न होने के चलते छात्र पूरी तरह से आक्रोशित हैं। छात्रों की अगुवाई करते हुए एबीवीपी छात्र संघ के धर्मशाला इकाई अध्यक्ष ढाल चंद ने बताया कि प्रदेश में जब से रूसा सिस्टम लागू हुआ है। परीक्षा के परिणामों में छात्रों के साथ इसी तरह से लगातार खिलवाड़ होता हुआ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार परीक्षा परिणाम 5 से सात फीसदी रहा हैं।
हैरत तो ये है कि जिस छात्र ने एक सबजेक्ट में अगर 80 से 90 फीसदी अंक हासिल किए हैं वहीं दूसरी तरफ दूसरे सबजेक्ट में उसे 10 से 15 नंबर दिए गए हैं, जो कि एक छात्र के साथ सरासर अन्याय है। विश्वविद्यालय की इस कारगुजारी से छात्रों का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटक रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम में जो अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें जल्द से जल्द दुरूस्त किया जाए। अगर यूनिवर्सिटी प्रशासन ऐसा करने में नाकाम साबित हुआ तो छात्रों के उग्र आंदोलन का उन्हें निकट भविष्य में सामना करना पड़ेगा, जिसका जिम्मेवार खुद यूनिवर्सिटी प्रशासन होगा।
डिग्री कॉलेज धर्मशाला के प्रिंसिपल राजेश शर्मा ने बताया कि छात्रों ने उन्हें लिखित में शिकायत दी है कि उनकी परीक्षाओं के परिणाम में बेहद गड़बड़ी सामने आई है, जो कि बेहद चिंता का विषय है। मगर वो यह बात स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि छात्रों की परीक्षाएं विश्वविद्यालय ही करवाता है। इसके लिए परीक्षा नियंत्रक ही जबावदेह होता है। महाविद्यालय की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। ऐसे में अगर कोई गड़बड़ी है तो परीक्षा नियंत्रक को जरूर इस पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि छात्र उनके लिए छात्र अपने बच्चों के सामान होते हैं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए अगर वाकई में कोई गड़बड़ी है तो उसे वक्त रहते सुधारना चाहिए।
