विकास शर्मा, चिंतपूर्णी : परागपुर के सरस्वती विद्या मंदिर में विज्ञान प्रयोगशाला बन कर तैयार हो गयी है। स्कूल में यह प्रयोगशाला समाजसेवी संजय पराशर की ओर से छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है जिसका उद्घाटन आज वरिष्ठ वैज्ञानिक सेवानिवृत डा. काशीनाथ दामोदर देवधर, समूह निदेशक आयुध अनुसंधान एंव विकास स्थापना, पुणे और संजय पराशर नेे किया। कार्यक्रम में सरस्वती विद्या मंदिर के 27 मेधावी विद्यार्थियों और तीन शिक्षकों को पराशर
की ओर से लैपटॉप भी भेंट किए गए। इस दौरान डॉ. काशीनाथ ने स्थानीय विद्यार्थियों के साथ एक घंटे तक संवाद सत्र किया, जिसमें उन्होंने विज्ञान विषय को लेकर छात्रों से रोचक तथ्य सांझा किए।
इस अवसर पर कैप्टन संजय ने कहा कि 1942 में अगस्त माह में ही देश में अंग्रेजों को भगाने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था, जिसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। पराशर ने कहा कि आज परागपुर में विज्ञान प्रयोगशाला के शुभारंभ पर वह भी संकल्प व शपथ लेते हैं कि जब तक जसवां-परागपुर क्षेत्र से गरीबी व बेरोजगारी दूर नहीं हो जाती, तब तक वह भी इन बिना थके व रूके कार्य करते रहेंगे। जीवन की अंतिम सांस तक जसवां-परागपुर क्षेत्र की जनता की सेवा करना उनका ध्येय है। संजय ने कहा कि चर्चा हमेशा होती रहनी चाहिए, चाहे वो सकारात्मक मुद्दे हों या नकारात्मक।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य व भाग्य से कदापि खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। इसी सोच को लेकर उन्होंने अपने संसाधनों से परागपुर के सरस्वती विद्या मंदिर में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुज्जजित विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण करवाया और साइंस लैब के लिए मेडीकल उपकरण और अन्य सामान भी लाकर दिया। मेधावी छात्र और मन लगाकर पढ़ाई कर सकें, इसके लिए उन्होंने इन बच्चों के लिए लैपटॉप की भी व्यवस्था की है। कैप्टन संजय ने कहा कि जसवां-परागुपर में विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए प्रयास होने चाहिए, लेकिन विडंबना है कि इस पर सही तरीके से काम नहीं हो रहा है। क्षेत्र के कॉलेजों में अभी तक विज्ञान विषय की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं, लेकिन आर्टस व कार्मस के विषयों के लिए पूरा स्टाफ तैनात नहीं है। कहीं प्राचार्य का पद रिक्त चल रहा है तो कई स्कूलों में बच्चे एकमात्र शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
पराशर ने कहा कि जसवां-परागपुर क्षेत्र में विजन और मिशन के तहत काम करने की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा के उत्थान पर सबसे पहले और सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. काशीनाथ दामोदर देवधर ने कहा कि इस क्षेत्र के विद्यार्थी बेहद प्रतिभाशाली हैं और उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाए तो वह जीवन में काफी आगे बढ़ सकते हैं।
