संजु चौधरी, शिमला: उत्तराखंड के जोशीमठ में हुई घटना के बाद अब हिमाचल को भी सबक लेने की जरूरत हैं। हिमाचल में जोशीमठ जैसे हालात पैदा ना हो इसके लिए मानवीय गलतियों में सुधार करने की आवश्यकता हैं। इस तरह की घटनाओं के लिए हाइड्रो प्रोजेक्ट के साथ-सथ मानवीय गलतियां भी कारण बनती हैं। जोशीमठ को लेकर वैज्ञानिकों ने हाइड्रो प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले ही चेताया था लेकिन इसके बावजूद भी भवनों का निर्माण और पावर प्रॉजेक्ट का निर्माण किया गया। यह बात किन्नौर के विधायक और जनजातीय व बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी वैज्ञानिकों की ओर से 1500 से अधिक क्षेत्रों को लैंडस्लाइड जोन घोषित किया गया हैं बावजूद इसके लोगअवैज्ञानिक तरीके से निर्माण कर रहें है जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत हैं। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिले के कई इलाके में भूस्खलन की घटनाएं होती हैं जिसके पीछे कई कारण हैं। इसके पीछे हाइड्रो प्रोजेक्ट भी एक बड़ा कारण हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट के निर्माण में कई किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण होता है जिसमें ब्लास्टिंग की जाती है जो काफी सस्ती होती हैं।
ब्लास्टिंग के कारण सुरंग के ऊपर वाले हिस्से में कंपन होती है और मकानों और जमीन धसने और दरारें आने का खतरा रहता हैं। इसलिए प्रॉजेक्ट के निर्माण में पर्यावरण प्रेमी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए। जल विद्युत परियोजना के सुरंग निर्माण के दौरान टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए जो काफी सुरक्षित हैं।
