Mandi, Dharamveer -:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी की ड्रोन टेक्नोलॉजी ने देश की रक्षा क्षमताओं को नई दिशा दी है। संस्थान द्वारा विकसित ड्रोन हाल ही में भारतीय सेना द्वारा मई 2025 में संचालित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शामिल हुए, जिसमें आईआईटी मंडी ने 16 अत्याधुनिक ड्रोन भेजे। इस उपलब्धि की जानकारी संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने आईआईटी मंडी के 13वें दीक्षांत समारोह के उपरांत मीडिया से बातचीत के दौरान दी।
प्रो. बेहरा ने बताया कि आईआईटी मंडी की ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब और डीआरडीओ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई नवाचारों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में संस्थान का यह योगदान महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. शेखर सी. मांडे, पूर्व महानिदेशक, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने विद्यार्थियों से विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “देश विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस मिशन में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है।”
समारोह की प्रमुख झलकियाँ:
- इस वर्ष कुल 604 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं — जिनमें 292 स्नातक, 241 स्नातकोत्तर और 71 पीएच.डी. शोधार्थी शामिल रहे।
- अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व में बेहतर प्रदर्शन के लिए कई छात्रों को पदक और पुरस्कार भी दिए गए।
- इस वर्ष का दीक्षांत समारोह विशेष रहा क्योंकि इसमें बी.टेक-एम.टेक ड्यूल डिग्री, बी.टेक विद सेकंड मेजर और बी.टेक विद स्पेशलाइजेशन के पहले बैच के विद्यार्थियों ने डिग्री प्राप्त की।
प्रो. बेहरा ने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम न केवल भूस्खलन की जानकारी दे रहा है, बल्कि अब भूकंप के पूर्व संकेत भी प्रदान करने में सक्षम हो गया है। इसके लिए टाटा ट्रस्ट द्वारा संस्थान को 20 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है, जो भूकंप रोधी संरचनाओं और आपदा प्रबंधन अनुसंधान में प्रयोग किया जाएगा।उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “13वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधियों का वितरण नहीं, बल्कि संस्थान की सतत प्रगति और नवाचार यात्रा का प्रतीक है।
