योगेश शर्मा, सोलन: कांग्रेस सरकार की ओर से नियुक्त किए गए 6 सीपीएस को लेकर भाजपा लगातार आ विरोध जता रही हैं। भाजपा की ओर से इन सीपीएस की नियुक्तियों को प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ाने का कारण बताया जा रहा हैं। भाजपा का कहना है कि जो सरकार व्यवस्था परिवर्तन करने की बात कर रही थी उसने व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश की जनता के साथ भद्दा मजाक किया हैं।
मंगलवार को सोलन में भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी करण नंदा ने सोलन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस सरकार पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने एक साथ 6 चीफ पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी (CPS) बनाकर हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर बोझ डालने का काम किया हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बार- बार व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रही है, क्या यही कांग्रेस सरकार का व्यवस्था परिवर्तन है?
उन्होंने कहा की हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने आनन-फानन में मंत्रिमंडल का गठन किया। यह गठन संसदीय क्षेत्र और जातीय दृष्टि से असंतुलित हैं। उन्होंने कहा कि सीपीएस और मंत्रियों की दृष्टि से कांगड़ा को पूरी तरह से दर किनार किया गया हैं। उन्होंने सवाल उठाए की 6 सीपीएस सरकार ने क्यूं बनाए और इनकी क्या जरूरत आन पड़ी हैं, समझ नहीं आ रहा है। सीपीएस बनाने से हिमाचल प्रदेश पर आर्थिक बोझ बढ़ा है क्योंकि उनको एक प्रोटोकॉल भी देना पड़ेगा, अनेकों दफ्तर और मंत्री के दर्जे की सुविधाएं भी देनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि आसाम, मणिपुर और दिल्ली सरकार के दौरान सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने सीपीएस के विरोध में फैसला सुनाया था और आर्टिकल 164 / 1 ए के आधार पर साफ लिखा है कि सीपीएस की नियुक्ति गलत है और जिस प्रकार से एक निर्धारित संख्या मंत्रियों के लिए आधारित की गई है, उसकी स्पिरिट को हानि पहुंचाता हैं।
वहीं सरकार की ओर से पेट्रोल डीजल पर वैट बढ़ाने का भी करण ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ाकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपने आय के साधन जुटाना चाहती है जो कि गलत हैं। वहीं उन्होंने कहा कि द्वेष की भावना से कांग्रेस की सरकार हिमाचल प्रदेश में काम कर रही हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण प्रदेश में 600 से ज्यादा कार्यालयों को कांग्रेस की ओर से बंद कर दिया गया हैं।
