राहुल चावला , धर्मशाला: प्रदेश में दो दशक से हजारों करुणामूलक आश्रित रोजगार के इंतजार में हैं। कांग्रेस ने चुनावों से पहले पहली कैबिनेट में करुणामूलकों के हित में निर्णय लेने का वादा किया हैं। ऐसे में अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को करुणामूलक संघ तपोवन में शीत सत्र के अंतिम दिन प्रदेश सरकार से मिलने पहुंचा। करुणामूलक संघ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि कई करुणामूलक आश्रित वर्ष 2001 से 2003 से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान करुणामूलक आश्रितों ने रोजगार के लिए सवा साल तक शिमला में आंदोलन किया, उसके बावजूद सरकार ने उनकी खैर-खबर तक लेना गवारा नहीं समझा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पूर्व में 5 हजार के करीब करुणामूलक आश्रित थे, जिनमें से अभी तक 2 हजार ही एडजस्ट हो पाए हैं, जबकि 3 हजार आश्रित अभी भी रोजगार की वाट जोह रहे हैं। यदि यह सरकार मांगें मानती है तो सरकार का धन्यवाद करने के लिए संघ आभार रैली का आयोजन करेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार अपने वादे अनुसार पहली कैबिनेट में करुणामूलक परिवारों के हित में फैसला ले और जितने भी केस पेंडिंग हैं, उन्हें मद्देनजर रखते हुए पहली कैबिनेट में संशोधान पॉलिसी लाए,जिससे नौकरी से वंचित करुणामूलकों को नौकरी मिल सके। अजय कुमार ने कहा कि पूर्व सरकार जल शक्ति विभाग और कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर व कई अन्य विभागों के पात्र आश्रितों को भी क्लास-डी में अपनी ओर से बनाई गई पॉलिसी के तहत भी नौकरी नहीं दे पाई।
यह हैं संघ की प्रमुख मांगें
करुणामूलक संघ ने जो मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं उसमें पहली कैबिनेट में पॉलिसी संशोधन किया जाए, जिसमें 5 लाख आय सीमा निर्धारित की जाए ओर एक व्यक्ति सालाना आय शर्त को हटाया जाए। वित विभाग की ओर स्व रिजेक्टेड केसों को कंसिडर न करने की नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाए और रिजेक्टेड केसों को दोबारा कंसीडर करने की नोटिफिकेशन जल्द की जाए। क्लास-सी व डी में कोटे की शर्त को हमेशा के लिए हटा दिया जाए ताकि सभी को एक साथ नियुक्तियां मिल सके। वहीं योग्यता के अनुसार क्लास-सी व डी के सभी श्रेणियों टेक्निकल व नॉन टेक्निकल में नौकरियां दी जाए ताकि एक पद पर बोझ न पड़े।
