Solan, 5 November-: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि प्रदेश सरकार न्यायपालिका की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक बजट जारी करने में देरी कर रही है। इसकी वजह से न्यायालयों की नियमित कार्यवाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश की छवि और विकास—दोनों के लिए हानिकारक है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की नाकामी के कारण प्रदेश भर में अराजक स्थिति बनती जा रही है। हाल ही में ठेकेदारों को भुगतान न मिलने के कारण एक भवन पर ताला जड़ने की घटना ने हिमाचल प्रदेश की देशभर में किरकिरी करवाई है। ठेकेदार संगठनों ने बार-बार सरकार से भुगतान की मांग की, किंतु सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विपक्ष द्वारा इन मुद्दों को उठाने पर भी सरकार झूठे आंकड़ों और मनगढ़ंत कहानियों से जनता को गुमराह कर रही है।
जाइका प्रोजेक्ट में केंद्र की हिस्सेदारी पर सरकार जारी करे श्वेत पत्र
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जाइका) द्वारा दिए जा रहे ₹1138 करोड़ के लोन को लेकर सरकार जनता को भ्रमित कर रही है।उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में 90% यानी ₹1042 करोड़ केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का योगदान केवल ₹113 करोड़ है।उन्होंने कहा कि हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए प्रदान किया था, जिसके तहत राज्य को केंद्रीय योजनाओं में मात्र 10% हिस्सा देना पड़ता है।जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि राज्य सरकार केंद्र की इस हिस्सेदारी से इनकार करती है, तो उसे इस विषय पर तुरंत एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।
भरमौर पीडब्ल्यूडी एक्सईएन कार्यालय का वायरल वीडियो, व्यवस्था परिवर्तन की पोल खोलता हुआ
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भरमौर के लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कांग्रेस नेता अधिकारियों को धमकाते और अपने चहेतों को टेंडर देने का दबाव बनाते दिखाई दे रहे हैं।जय राम ठाकुर ने कहा कि यह वीडियो “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर चल रही सत्ता संरक्षित गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार को उजागर करता है।अब टेंडर देने का पैमाना गुणवत्ता या कार्यक्षमता नहीं, बल्कि कांग्रेस नेताओं की नज़दीकी बन गया है।उन्होंने कहा कि कभी अधिकारी कार्यालयों में बंधक बनाए जाते हैं, तो कभी चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया ही निरस्त कर दी जाती है।
