संजु चौधरी, शिमला: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाला। नेता प्रतिपक्ष ने अपना कार्यभार संभालते ही कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दों को लेकर सदन के बाहर व अंदर जोरदार तरीके से अपनी बात रखेगा। सरकार के एक महीने के कार्यकाल में प्रदेश में अव्यवस्था का आलम हो गया हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के निर्णय रद्द करने की जो शुरुआत की वो अच्छी शुरुआत नहीं हैं। आने वाले समय में पांच साल के फैसले भी रिव्यू किए जा सकते हैं। इस सरकार ने कुछ योजनाओं के नाम बदलने की शुरुआत की हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अटल जी के नाम पर बोर्डिंग स्कूल की जो योजना शुरू की थी उसका नाम बदलकर सरकार अब राजीव गांधी के नाम पर कर रही हैं जो स्वस्थ परंपरा नहीं हैं। नाम बदलकर योजनाएं चलाने का चलन अच्छा नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ओपीएस देना अच्छी बात हैं, लेकिन इसके लिए संस्थानों को बंद करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में वृद्धि कर गरीबों पर महंगाई का बोझ डाला गया हैं। कोविड के बावजूद बीजेपी की सरकार ने पूर्व की कांग्रेस सरकार से कम कर्ज लिया। एक तरफ सरकार सरकारी खजाना खाली होने की बात कह रही हैं दूसरी ओर छः सीपीएस बनाए गए हैं और अन्य लोगों को भी कैबिनेट रैंक दिए जा रहे हैं।
यह सरकार तालों की सरकार
सीमेंट फैक्ट्री विवाद सरकार का दायित्व हैं। सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और रास्ता निकाले। पहले की सरकारों ने भी मामले सुलझाए हैं। जब से यह सरकार सत्ता में आई है चारों ओर अव्यवस्था का आलम हैं। क्या ऐसी ही व्यवस्था परिवर्तन करने की बात मुख्यमंत्री कर रहे हैं यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। संस्थानों में तालों के बाद सीमेंट फैक्ट्री में ताले लग गए यह सरकार तालों की सरकार बन कर रह गई हैं।
