मंडी : परी शर्मा- हिमाचल प्रदेश की संस्कृति की तरह मंडी की महाशिवरात्रि का पर्व कई मायनों में अनोखा है। हर देवी-देवता का अपना इतिहास होता है ,लेकिन एक ऐसी देवी भी है जो शिवरात्रि के दौरान श्मशान घाट में विराजती है। देवी का नाम काशमीरी माता है लेकिन राजा ने देवी का नाम मड भारवन रख दिया।
दरअसल हिमाचल के लगभग हर गांव के अपने देवता होते हैं। इन्हीं देवताओं की जलेब शिवरात्रि में पहुंचती है और इसे खास बना देती है। हर देवी-देवता का अपना इतिहास होता है लेकिन एक ऐसी देवी जिसका नाम काशमीरी माता है लेकिन राजा ने देवी का नाम मड भारवन रख दिया जिसका मूल सराज के देऊल गांव मे है।यह देवी शिवरात्रि में खास मानी जाती है क्यों कि यह देवी शिवरात्रि के दौरान श्मशान घाट में विराजती हैं। देवी के गुर ने बताया कि वर्ष पहले मंडी के राजा ने सभी देवी देवताओं की शक्ति की परीक्षा ली जिसमें राजा ने कहा था कि जो देवी देवता मेरे पास चलकर आएगा वो सर्वश्रेष्ठ है, इतने में देवी उठी और राजा के पास चली गई है और विराट रुप राजा को दिखाया और राजा डर गया। राजा ने उस समय सैनिकों को आदेश दिया कि देवी को श्मशान घाट ले जाओ और उस समय से देवी का नाम मड भारवन रखा तब से लेकर आज तक देवी मंडी के पंचवक्त्र मंदिर में शिवरात्रि के दौरान रहती है । बता दें पंचवक्त्र मंदिर से पहले उस जगह में राजा के समय श्मशान घाट होता था ।
