चिंतपूर्णी (विकास शर्मा): एक ओर तो सरकार प्रदेश में खेलों ओर खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने ओ सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे है। हालात यह है कि सरकार और प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ियों की भी सुध तक नहीं ली जा रही है। हिमाचल प्रदेश जिला ऊना की दोबेटियां जिनमें एक राष्ट्रीय और एक राज्य स्तरीय खेलों में अपना दमखम दिखा चुकी है, लेकिन ना तो हिमाचल सरकार और ना ही प्रशासन की तरफ से कोई मदद इन बच्चियों को मिली। सिर्फ अखबारों में और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तारीफ करके प्रशासन अपना काम किया। इन खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग दे कर या अन्य सुविधाएं मुहैया करवाने के कोई भी प्रयास नहीं हो रहे हैं।
बता दें कि मदनलाल जोकि ग्राम पंचायत डुुहल भंटवाला बंनसेहडा गांव का निवासी है उनकी दोनों बेटियां जिनमें से एक दसवीं क्लास और दूसरी 12वीं क्लास की छात्रा है। यह दोनों बच्चियां अलग-अलग स्कूलों में पढ़ती है ओर इस साल जोनल खेलों में इन दोनों बच्चियों ने अपने-अपने स्कूल की तरफ से खेल प्रतियोगिता में भाग लिया। यह दोनों बच्चियां जिला ऊना के बेहड जसंवा स्कूल में खेल प्रतियोगिता में खेलने गई थी। बैडमिंटन प्लेयर दोनों बच्चियां जब अपने-अपने स्कूल की तरफ से फाइनल में पहुंची तो मैच और भी रोमांचकारी हो गया। दोनों तरफ दोनों बहने थी जो कि अपने स्कूल के लिए खेल रहे थे। दोनों बहनों ने अपने स्कूल के लिए अच्छा दमखम दिखाया, जिसमें 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा नम्रता ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भरवाई के लिए फाइनल मैच जीता। इन दोनों बच्चियों के मैच की पूरे इलाके में सराहना की गई।
इन दोनों बच्चियों ने अपने लिए ना खेल कर अपने स्कूल के लिए पूरी खेल भावना के साथ इस खेल को खेला। 12वी में पढ़ने वाली नम्रता जब आठवीं क्लास की छात्रा थी, तब नेशनल खेलने के लिए आंध्र प्रदेश गई थी लेकिन वहां पर अच्छा खेल दिखाने के बाद भी नम्रता थोड़े से नंबर के पीछे रह गई। उसके बाद ना तो प्रशासन ने और ना ही किसी ने इन बच्चों का हाथ थामा। नम्रता और उसकी बहन सिमरन बिना किसी कोचिंग से इतना अच्छा खेलती है की अगर प्रशासन को और हिमाचल सरकार को इन दोनों बच्चियों की कोचिंग की तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि यह दोनों बच्चियां हिमाचल के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर सकें।
गरीब परिवार होने के बाद भी अभिभावक कर रहे प्रोत्साहित
बता दें कि इस दोनों ही बच्चियां गरीब परिवार से संबंध रखती है। जिस घर में यह बेटियां जिस घर में रहती है उस घर की हालत भी बदतर है। बावजूद इसके भी इनके अभिभावक पश्चिम बच्चियों की प्रतिभा को समझते हुए उन्हें खेलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
