राहुल चावला,धर्मशाला: प्रदेश में 2100 करोड़ रुपए की लागत से प्रदेश सरकार नई टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करेगी। इसके लिए 800 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नेशनल कांफ्रेंस आफ स्टेट टूरिज्म मिनिस्टर्स की तीन दिवसीय कांफ्रेंस के दूसरे दिन कांफ्रेंस में शिरकत करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांफ्रेंस में जो भी सुझाव आएंगे, हम उनका अध्ययन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा धर्मशाला के मैक्लोडगंज में रहते हैं, जिसके चलते देश-विदेश के पर्यटक व बौद्ध अनुयायी यहां आते हैं, यहां कनेक्टिविटी भी बेहतर है, जिसके चलते इस कांफ्रेंस के लिए भी धर्मशाला को चुना गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कनेक्टिविटी की समस्या रहता है, यहां एकमात्र सड़क ही कनेक्टिविटी का साधन है। सड़कें भी टूटती हैं, उनकी रिपेयर करनी पड़ती है। प्रदेश में हालांकि तीन एयरपोर्ट हैं, लेकिन छोटे है, बड़े हवाई जहाज न आ पाने की वजह से हवाई यात्रियों को ज्यादा खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में प्रदेश में नए और बड़े एयरपोर्ट की जरूरत है, इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधा दर्जन के करीब नई टूरिस्ट डेस्टिनेशन साइटस हमने तलाश ली हैं, जिससे कि पर्यटक यहां आएं और लंबे समय तक ठहर सकें। छोटी काशी मंडी में चार धाम की तर्ज पर शिव धाम बनाया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। टूरिज्म डेवेलपमेंट के लिए प्रोफेशनलिज्म और नई पहल करना जरूरी है, सरकार उस दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में पर्यटन क्षेत्र में काम करने का प्रयास किया है। प्रदेश में प्रकृति और कानून व्यवस्था अच्छी है, ऐसे में पर्यटक यहां दिन-रात बेखौफ होकर घूम सकते हैं। हिमाचल की प्रकृति पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटन के कई प्रावधान है, जिसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यटन मुझे अपने पास रखने को कहा है। प्रदेश में नई मंजिलें, नई राहें स्कीम शुरू की गई है, जिसके तहत पर्यटन विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं। सभी को नए पर्यटन स्थल तलाशने चाहिए। प्रदेश में कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जहां हम पहुंच नहीं पाए हैं। बांधों पर भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित हों, इसको लेकर कार्य किया जा रहा है।
टूरिज्म डिवेलपमेंट के लिए हेल्दी कॉम्पिटिशन होना चाहिए । सभी राज्यों के पर्यटन मंत्रियों को एक-दूसरे से सीखते हुए अपने राज्य को पर्यटन क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए प्रतियोगिता करनी चाहिए। हेल्दी कन्वर्सेशन और हेल्दी कंपटीशन बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री किशन रेडडी ने कहा कि पर्यटन विभाग का बजट कम है, लेकिन बड़ा काम करने को है। छोटे राज्य इसके लिए मास्टर प्लान तैयार करें और देखें कि किन-किन विभागों को इसमें शामिल किया जा सकता है। पर्यटन विकास के लिए हर विभाग आगे आए, यदि कोई टूरिस्ट डेस्टिनेशन है तो वहां पर बिजली, पानी, सडक़, इंटरनेट आदि की बेहतर सुविधा होना अति जरूरी है। राज्यों को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी है तो मनरेगा, पीएम सडक़ योजना सहित अन्य योजनाओं के तहत भी रास्तों व सडक़ों का निर्माण किया जा सकता है, इस दिशा में भी प्रयास होने चाहिए। पर्यटन को बढ़ावा देने का दायित्व मात्र पर्यटन विभाग का नहीं है, बल्कि इसके लिए हर विभाग को आगे आना होगा और जन भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
वर्तमान में सबसे बड़ा टॉस्क यह है कि विभिन्न राज्यों के लोग विदेशी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर बात करते है, अपने राज्य की डेस्टीनेशन पर कोई बात नहीं करना चाहता। अगर बर्फ देखनी हो तो लोग स्विटजरलैंड का नाम पहले लेते हैं, लेकिन उन्हें हिमाचल भी याद रखना चाहिए। हिमाचल, स्विटजरलैंड से कम नहीं है, यहां प्रकृति भरपूर है और कई टूरिस्ट डेस्टिनेशन है जैसे कि धौलाधार की पहाड़ियां,अटल टनल, खजियार झील सहित अन्य कई जगहें है, जहां लोग जाना पसंद करते है।
