बीबीएन:जगत सिंह- हिम परिवेश पर्यावरण संरक्षण संस्था की बैठक में बीबीएन क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर रोष प्रकट किया गया। सदस्यों ने कहा कि लीज के नाम पर खननकारी कानून की धज्जियां उड़ाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे है।
बीबीएन की नदियों, खड्डों को कई कई फीट तक खोद दिया गया है। खनन पर कार्रवाई न होते देख सभी सदस्यों ने एकमत से विभाग के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह ठाकुर ने कहा कि क्रशर संचालक सरकार के किसी भी कानून को नहीं मान रहे है। जहां पर क्रशर लगाया गया है, वहां से निकलने वाले प्रदूषित पानी को ट्र्रीट करने नहीं छोड़ा जा रहा है। क्रशर संचालक उसके साथ लगती नदियों में छोड़ रहे है। ऐसे में नदियों का पानी भी प्रदूषित हो गया है। पिछले दिनों चिकनी नदी में दो आवारा पशु क्रशर से निकलने वाले पानी की दलदल में फंस गए और ग्रामीणों ने बड़ी मशक्त के बाद पशुओं को बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। उन्होंने कहा कि लीज के नाम पर नदियों को तीन फीट की बजाय कई-कई फीट तक खोद दिया गया है। इससे क्षेत्र की कई पेयजल और सिंचाई स्कीमों का जलस्तर नीचे चल गया है। उन्होंने कहा कि खनन रोकने में खनन विभाग सफेद हाथी साबित हो गया है।पिछले कई वर्षों से अधिकारी यहां पर डेरा जमाएं हुए बैठे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि खनन रोकने के लिए कार्य करने वाले अधिकारियों की यहां पर ड्यूटी लगाई जाएं।
हाईकोर्ट का खटकताएंगे दरवाजा
संस्था के अधिवक्ता नरेश घई ने बताया कि खननकारी लोगों की उपजाऊ भूमि को भी निशाना बना रहे है। प्रशासन की ओर से निर्देश देने के बावजूद भी क्रशर संचालक लीज एरिया की निशानदेही करवा रहें हैं। उन्होंने कहा कि खनन करने वालों के खिलाफ चोरी का केस बनाने का प्रावधान किया जाएं। उन्होंने प्रशासन से जल्द बैठक बुलाने की मांग उठाई है। साथ ही उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देकर कहा है कि अगर जल्द ही प्रशासन अवैध खनन के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया तो वह हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटएंगे।
