सोलन/योगेश शर्मा- हिमालय क्षेत्र के सतत विकास के लिए पिछले कल से नौणी विश्विद्यालय में तीन दिवसीय महामंथन शुरू हुआ है जिसमे ऐसे किसान बतौर वक्ता शामिल हुए जो कभी कर्ज में डूबे हुए थे और आज एक प्रगतिशील किसान है। हम बात कर रहे हैं पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित कंवल सिंह चौहान कि जिन्होंने परंपरागत खेती को छोड़कर वर्ष 1998 में सबसे पहले मशरूम और बेबी कॉर्न की खेती करने की ठानी और उनका यह फैसला कामयाब रहा। दोनों फसलों से अच्छा मुनाफा हुआ, इसके बाद वो क्षेत्र में किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए।
क्षेत्र में क्रांतिकारी किसान के रूप में जाना जाता है
नौणी में आयोजित सम्मलेन के दौरान बातचीत में पद्मश्री कंवल सिंह चौहान ने बताया कि उन्हें साल 2019 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। हरियाणा में सोनिपत जिले के ग्राम अटेरना निवासी पद्मश्री कंवल सिंह चौहान एक प्रगतिशील किसान हैं,अपने आस-पास के क्षेत्र में इन्हें क्रांतिकारी किसान के रूप में जाना जाता है, तो वहीं सरकार ने इन्हें फादर ऑफ बेबी कॉर्न का नाम दिया है। ऐसा इसलिए कि इस क्षेत्र में स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न और मशरूम की खेती को शुरू करने और किसानों को इसकी खेती करने के लिए उन्होंने ही प्रोत्साहित किया।
कंवल सिंह का कहना है कि आज देश और प्रदेश में युवा नौकरी की तरफ भाग रहे है, लेकिन उन्हें अपना रुझान खेती की तरफ रखना चाहिए। बता दें कि कंवल सिंह चौहान डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्विद्यालय नौणी में आयोजित तीन दिवसीय हिमालय क्षेत्र के सतत विकास पर आधारित सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए है।
